इस वर्ष भी प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में गणतंत्र दिवस की धूम फीकी देखने को मिली जहाँ इंदौर के जिला जेल व केंद्रीय जेल में कैदियों के चेहरे पर खुशी अलग ही झलक रही थी खुशी क्यो ना हो क्योंकि आज जिला जेल व केन्द्री जेल से 24 छूट कर अपने घर जा रहे है हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 24 केदियो को रिहा किया गया जिसके उपरांत पहले झंडा वंदन किया गया हालांकि कोरोना काल ने इस साल भी गणतंत्र दिवस की खुशी को कम कर दिया है।
दरसअल राज्य शासन के आदेश अनुसार हर साल केदियो को रिहा किया जाता है जहाँ गणतंत्र दिवस के मौके पर जिला जेल व केंद्रीय जेल से आज 24 केदियो को रिहा किया गया जो कैदी रिहा हुए है उनके चेहरे पर खुशी अलग ही दिख रही थी क्योंकि कोई कैदी बीस साल से जेल में रहकर सजा काट रहा था तो कोई केदी उम्र कैद काट रहा था मगर अच्छे चाल चलन को देखते हुए इन केदियो की सजा माफ कर दी गई बहराल ये वो कैदी है जो हत्या व लूट जैसे संघीन अपराध में कई वर्षी से जेल में बंद थे
वही जेल से 16 साल बाद रिहा हुए केदी गोलू ने बताया कि जमीनी विवाद में हत्या हो गई थी जिसका पछतावा हत्या करने बाद हुआ वही गोलू के कहना है कि जेल से छूटने के बाद खेती बाड़ी कर अपना जीवन बिताएंगे वही पिछले कई सालों से सजा काट रहे कैदी धर्मेंद्र पर्सी ने बताया कि में अपनी ही पत्नी की हत्या में सजा काट रहा था जहा बाहर जाने की खुशी है तो वही गम भी बहुत है वही जेल से रिहा हुए केदियो ने अपराध से तौबा करते हुए कहा कि अपराध नही करना चाहिए
