इंदौर के चिड़ियाघर को लाखों का नुकसान, अटकी प्ले जोन में बंदरों की शिफ्टिंग

By Abhishek Raghuvanshi
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बुरहानपुर से रेस्क्यू की गई मादा तेंदुआ के गायब होने से चार दिनों से चिड़ियाघर दर्शकों के लिए बंद है। जू में औसतन हर दिन 4500 दर्शक आते हैं। यह आंकड़ा शनिवार-रविवार को बढ़कर 10 से 15 हजार तक पहुंच जाता है। इसके चलते इन चार दिनों में करीब 7 लाख से ज्यादा का नुकसान चिड़ियाघर प्रशासन को हो गया है। तेंदुए को ढूंढने के चक्कर में प्ले जोन में बंदरों की शिफ्टिंग भी अटक गई है। चिड़ियाघर प्रभारी डा. उत्तम यादव का कहना है कि पांच दिन तलाशने के बाद भी जू में मादा तेंदुआ नहीं मिली। अब जू दोबारा खोलने के लिए अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
चिड़ियाघर के बाहर के हिस्से में तलाशा तेंदुआ
लगातार पांचवें दिन भी मादा तेंदुआ को तलाशने में वन विभाग और चिड़ियाघर की विभिन्ना दल जुटे हुए थे। चिड़ियाघर में नाले के पास पग मार्क के लिए सूखी मिट्टी बिछाने के साथ ही जू के आसपास के क्षेत्रों की तलाश की गई। इसमें आजाद नगर के पास नाले का हिस्सा, उद्यान विभाग की नर्सरी, मोदी का भट्टा और रेसीडेंसी क्षेत्र में तलाश की गई। इस दौरान जू प्रभारी उत्तम यादव, डीएफओ नरेंद्र पंडवा और सीसीएफ सीएच मोहंता भी मौजूद थे। इस दौरान स्निफर डाग की मदद ली गई।
नुकसान का गणित

  • चिड़ियाघर गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को बंद रहा
  • सोमवार को साप्ताहिक अवकाश था
  • 4000 दर्शन आते हैं एक सामान्य दिन में
  • 8000 रुपये का नुकसान हुआ गुरुवार और शुक्रवार को
  • 25 हजार दर्शक आते हैं शनिवार-रविवार को करीब
    33 हजार दर्शक आने से वंचित रहे
  • 20 रुपये प्रति व्यक्ति टिकिट दर
  • 6 लाख 60 हजार रुपये का सीधा नुकसान
  • 5 रुपए प्रति व्यक्ति सांप घर का शुल्क
  • 25 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट है पक्षी विहार का
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