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पोलिश स्टूडेंट को दिया केंद्र का भारत छोड़ने का नोटिस हाईकोर्ट ने किया रद्द

जादवपुर विश्वविद्यालय का यह स्टूडेंट CAA के विरोध प्रदर्शन में शामिल था (सांकेतिक तस्वीर) न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) में अध्ययनरत पोलैंड (Poland) के छात्र को दिये नोटिस को तामील नहीं किया जाए.

Abhishek Raghuvanshi18 मार्च 2020 · 1 मिनट पढ़ें
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पोलैंड के स्टूडेंट को केंद्र ने दिया था भारत छोड़ने का नोटिस, कलकत्ता हाईकोर्ट ने किया रद्द

जादवपुर विश्वविद्यालय का यह स्टूडेंट CAA के विरोध प्रदर्शन में शामिल था (सांकेतिक तस्वीर)

न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) में अध्ययनरत पोलैंड (Poland) के छात्र को दिये नोटिस को तामील नहीं किया जाए.

कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में यहां एक रैली में कथित तौर पर भाग लेने को लेकर पोलैंड (Poland) के एक छात्र को ‘भारत छोड़ने’ के लिये केंद्र सरकार द्वारा दिया गया नोटिस (Notice) बुधवार को रद्द कर दिया. अदालत ने इसे अति-प्रतिक्रिया बताया है.

न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) में अध्ययनरत पोलैंड (Poland) के छात्र को दिये नोटिस को तामील नहीं किया जाए.

जादवपुर में तुलनात्मक साहित्य के स्टूडेंट हैं कामिल
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार (Central Government) को इस नोटिस पर अमल से सरकार को 18 मार्च तक रोक दिया था.पोलैंड का छात्र कामिल सीदेजंस्की जादवपुर विश्वविद्यालय में तुलनात्मक साहित्य (Comparative Literature) विभाग में एमए का छात्र है. उसे 14 फरवरी को कोलकता के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ने यह नोटिस जारी किया था.

नोटिस में छात्र को 14 दिनों में भारत छोड़ने का दिया था आदेश
उच्च न्यायालय (High Court) के समक्ष अपनी याचिका में छात्र ने नोटिस पर तामील करने से अधिकारियों को रोके जाने का अनुरोध किया.नोटिस में छात्र (Student) को 14 दिन के भीतर भारत छोड़ने के लिए कहा था. छात्र को 24 फरवरी को नोटिस प्राप्त होने के बाद नौ मार्च तक देश छोड़ना था. हालांकि अदालत ने पांच मार्च को नोटिस पर रोक लगा दी थी.

कोर्ट ने कहा, भारतीय धरती से निर्वासन का कोई उचित आधार नहीं बनता
आदेश पारित करते हुए अदालत (Court) ने कहा कि भारतीय धरती से याचिकाकर्ता के निर्वासन के लिए कोई उचित आधार नहीं बनता है.

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि एक विदेशी का बुनियादी और मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ जुड़ा हुआ है.

अदालत ने कहा कि इस प्रकार निष्कासन का आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) में निहित अधिकारों के विपरीत, एक अति-प्रतिक्रिया है.

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First published: March 18, 2020, 11:58 PM IST

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