इंदौर के एयरपोर्ट रोड स्थित एक पॉश कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।

पुलिस मामले की जांच में जुटी
इंदौर में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला एयरपोर्ट रोड स्थित एक पॉश कॉलोनी का है, जहां एक रिटायर्ड बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। गनीमत यह रही कि अखबार में छपी एक खबर ने उन्हें सच्चाई का अहसास कराया और वे बड़ी ठगी का शिकार होने से बच गए। सूचना मिलते ही राज्य साइबर सेल की टीम मौके पर पहुंची और उन्हें सुरक्षित किया।
फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर डराया
पीड़ित दंपती में पत्नी शासकीय स्कूल से प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि पति बैंक से रिटायर्ड अधिकारी हैं। पिछले कुछ दिनों से उन्हें अनजान नंबरों से कॉल आ रहे थे। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई के केनरा बैंक में एक अवैध खाता खोलने के लिए किया गया है। ठगों ने आरोप लगाया कि उस खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है और इसके बदले दंपती ने 10 प्रतिशत कमीशन लिया है।
गिरफ्तारी का डर और वीडियो कॉल पर निगरानी
ठगों ने बुजुर्ग दंपती को इतना डरा दिया कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह उनके नियंत्रण में आ गए। आरोपियों ने कहा कि सीबीआई की टीम उन्हें गिरफ्तार करने आ रही है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उन्हें नकली पुलिस स्टेशन और कोर्ट के दृश्य दिखाए गए। उन्हें आदेश दिया गया कि वे 24 घंटे अपना कैमरा चालू रखें। दहशत का आलम यह था कि जब घर में काम करने वाली महिला सफाई के लिए आई, तो ठगों के कहने पर दंपती ने उसे कमरे में आने से मना कर दिया।
अखबार की खबर से हुआ बचाव
शनिवार को बुजुर्ग दंपती ने अखबार में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी एक खबर पढ़ी। यह खबर उनकी आपबीती से काफी मिलती-जुलती थी। इसे पढ़ने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे भी साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपने एक परिचित को इसकी जानकारी दी। परिचित ने समझदारी दिखाते हुए राज्य साइबर सेल को सूचित किया। साइबर सेल के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामले को संभाला और दंपती को इस जाल से बाहर निकाला।

