
पहली सवारी शाम 4 बजे अपने श्री चंद्रमौलेश्वर रूप में पारंपरिक कार्तिक मास की दूसरी सवारी के रूप में और दूसरी बार रात 11 बजे वैकुंठ चतुर्दशी की पावन रात्रि में होने वाले हरिहर मिलन के अवसर पर।
रात की सवारी में वे गोपाल मंदिर पहुंचकर भगवान श्री हरि विष्णु से मिलन कर सृष्टि का कार्यभार सौंपेंगे
