
इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में रणजीत लोक का काम की शुरुआत हो चुकी है। ये काम 7 करोड़ रुपए की लागत से होना है। बुधवार को नगर निगम स्मार्ट सिटी और मंदिर प्रबंधन के लोगों ने यहां किए जाने वाले काम को लेकर निरीक्षण किया। साथ ही नगर निगम की टीम ने यहां पर मार्किंग का काम किया।
रणजीत लोक के काम अलग-अलग चरणों में किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसलिए सबसे पहले काम की शुरुआत मंदिर की छोटी पार्किंग से की जाएगी। इसके बाद आगे का काम शुरू होगा। इसकी शुरुआत नवरात्रि में होगी।
इंजीनियरों ने देखा मंदिर परिसर
नगर निगम की टीम और स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों ने मंदिर का निरीक्षण किया। यहां किए जाने वाले काम को लेकर नक्शे का रिव्यू किया। साथ ही काम की शुरुआत कहां से की जाना है और कितने चरणों में की जाएगी यह भी चर्चा की। निरीक्षण के दौरान मंदिर प्रबंधन के पदाधिकारी वह भक्त मंडल के सदस्य भी मौजूद थे।
कुछ दिनों पहले ही किया था भूमि पूजन
पिछले दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इंदौर में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। मुख्यमंत्री ने इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर के पुनर्विकास कार्यों का वर्चुअल माध्यम से भूमिपूजन किया है, जिसमें लगभग 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे और मंदिर क्षेत्र का सौंदर्यीकरण व श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
सांवरिया सेठ मंदिर को भी देखने जाएंगे
मंदिर प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक आगामी दिनों में मंदिर प्रबंधन स्मार्ट सिटी के इंजीनियर ठेकेदार सहित अन्य लोग सांवरिया सेठ मंदिर में भी जाएंगे और वहां की प्लानिंग को भी देखेंगे। रंजीत लोक की प्लानिंग भी लगभग इसी तरह की है। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। रणजीत लोक के काम की शुरुआत नवरात्रि के पर्व के साथ होगी। सबसे पहले मंदिर में बनी छोटी पार्किंग में काम शुरू किया जाएगा। छोटी पार्किंग में जिक-जेक बनाया जाएगा, जिससे भक्त मंदिर के अंदर प्रवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही ऊपर शेड डाला जाएगा, ताकि भक्तों को गर्मी, बारिश में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। रणजीत लोक का काम पूरा होने से भक्तों को काफी सुविधाएं मिलेंगी।बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी। 25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा।
पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम
वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई।
