
मुंबई के लालबागचा राजा का विसर्जन हमेशा आकर्षण का केंद्र रहता है। गणेश चतुर्थी सेलिब्रेशन के समापन (6 सितंबर) पर हर साल हजारों भक्त गिरगांव चौपाटी पर अपने प्रिय ‘लालबाग राजा’ को विदा करने के लिए जुटते हैं। इस साल विसर्जन एक खास तरीके से बने, बिजली से चलने वाले राफ्ट (नाव जैसे प्लेटफॉर्म) पर होगा।
राफ्ट कैसे बनाया गया है?
यह राफ्ट हाइड्रॉलिक सिस्टम और इलेक्ट्रिकल कंट्रोल्स से लैस है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह विशालकाय मूर्ति को धीरे-धीरे समुद्र में उतारे और लहरों के बीच भी संतुलन बनाए रखे।
पहली बार नहीं हो रहा ये काम
यह पहली बार नहीं है जब लालबागचा राजा ने तकनीकी नवाचार अपनाया है। साल 2016 में पहली बार मैकेनाइज्ड (मशीन से चलने वाला) राफ्ट लाया गया था। उस समय 12 टन वजनी, 19×19 फीट का प्लेटफॉर्म बनाया गया था, जिसमें हाइड्रॉलिक टिल्टिंग सिस्टम लगा था। तभी से मंडल लगातार इसमें सुधार करता आया है। इस साल का राफ्ट पहले से ज्यादा हल्का, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है।
जानिए विसर्जन से पहले की रस्मे
विदाई की तैयारी उतनी ही भव्य होती है जितनी मूर्ति स्थापना की। पंडाल में विसर्जन से कुछ दिन पहले ही दर्शन की लाइनें बंद कर दी जाती हैं ताकि स्वयंसेवक मूर्ति को ले जाने की तैयारियों पर ध्यान दे सकें। सुबह के समय पुजारी राफ्ट की पूजा करते हैं और फिर उसे फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। चौपाटी पर क्रेन, गोताखोर, पुलिस और बीएमसी की टीमें मौजूद रहती हैं, ताकि लाखों भक्त सुरक्षित तरीके से यह दृश्य देख सकें।
भक्तों की भावनाएं
भक्तों के लिए लालबागचा राजा को विदा करना बेहद भावुक पल होता है। ज़्यादातर लोग टीवी, लाइव या सोशल मीडिया पर घंटों तक यह दृश्य देखते हैं। हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं, आँखें नम हो जाती हैं, और वातावरण में ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ की गूंज फैल जाती है।
आख़िरकार, राफ्ट तो बस एक साधन है। असल में लालबागचा राजा को समुद्र तक और करोड़ों दिलों तक पहुंचाने वाली ताक़त है भक्तों की अटूट श्रद्धा, जो समय बदलने पर भी कभी कम नहीं होती।

