
झलक दिखाकर JPC में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ बिल को पुर:स्थापित करने या बिल के एडमीशन पर वोटिंग हुई है, इसे बिल पर वोटिंग या बिल को पास करने की वोटिंग से कनफ़्यूज ना करें। जैसा कि कहा था कि यह बिल जब भी आएगा, सिर्फ़ झलक दिखाकर संयुक्त संसदीय समिति के ठंडे बस्ते में चला जाएगा। श्री अमित शाह और श्री मेघवाल दोनों ने ही बिल प्रस्तुत करने के पहले ही इसे JPC में भेजने की बात कर दी ताकि ज़्यादा बतंगड ना बने। बिल के एडमीशन के लिए वोटिंग के बाद बिल प्रस्तुत हुआ, तुरत -फुरत JPC के लिए रेफ़र किया गया और लोकसभा की कार्यवाई तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। ओम् शांति …
अब आगे – JPC में संख्या बल के आधार पर भाजपा के सांसदों की संख्या अधिक रहेगी। लेकिन चूँकि ये संविधान संशोधन बिल के रूप में प्रस्तुत है अतः इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत ज़रूरी होगा, जो मोदी सरकार के पास है नहीं और विपक्ष इस मुद्दे पर पूरा एक हो चुका है अतः टूट-फूट की सम्भावना भी नहीं है।
केवल मोदीजी की ज़िद – इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता भी एकमत नहीं हैं। अब JPC में इसके ड्राफ़्ट निर्माण, आपत्ति, समाधान आदि में लम्बा समय बीतने के बाद जब बिल फ़्लोर पर वोटिंग के लिए आएगा तब तक राजनीति में कौन कहाँ होगा कहा नहीं जा सकता। इसलिए फ़िलहाल दो तिहाई बहुमत के अभाव में इस बिल का तुरंत कोई निदान नहीं है। अतः ये बिल वहाँ पहुँच गया जहाँ पहुँचना इसकी नियति थी- JPC के ठंडे बस्ते में। वक़्फ़ संशोधन बिल के साथ ये बिल भी आराम करेगा। #आलोकबाजपेयीकहिन
