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मप्र हाईकोर्ट की वक्‍फ बोर्ड पर तल्ख टिप्पणी, वकील समेत वक्‍फ से जुड़े सभी लोगों को लगाई फटकार

जस्‍टिस अहुलवालिया बोले - ताजमहल और लालकिला को भी वक्‍फ की संपत्‍त‍िघोषित कर दें…डॉ. मयंक चतुर्वेदीभोपाल, 7 अगस्त (हि.स.)।

Abhishek Raghuvanshi8 अगस्त 2024 · 1 मिनट पढ़ें
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जस्‍टिस अहुलवालिया बोले – ताजमहल और लालकिला को भी वक्‍फ की संपत्‍त‍िघोषित कर दें…
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भोपाल, 7 अगस्त (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश हाइकोर्ट द्वारा दिए गये एक फैसले को एक सप्‍ताह से अधिक हो गया है लेकिन उससे जुड़ी जजमेंट संबंधी वीडियो अभी वायरल हुई है, जिसमें कि मौखिक रूप से किस तरह से जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बैंच ने वक्‍फ बोर्ड के सभी दावों को नकारते हुए उसके अधिवक्‍ता एवं अन्‍य पदाधिकारियों को फटकार लगाई, यह सामने आया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई इमारत प्राचीन स्मारक घोषित है तो उसे वक्फ की संपत्ति बताना बेमानी है।

दरअसल, मामला राज्‍य के बुरहानपुर में मुगल बादशाह शाहजहां की बहू बीबी साहिब और नादिरशाह के मकबरे समेत कुल तीन संपत्तियों पर वक्फ के मालिकाना हक के दावों से जुड़ा था। इसे वक्‍फ ने अपना होना बताया था, जबकि ये राष्‍ट्री य स्‍तर के स्‍मारक घोषित हैं और एएसआई इस जगह की देखरेख कर रही है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि क्या ताजमहल और लालकिला सहित देश की सारी संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दें? जस्टिस अहलूवालिया ने इस दौरान वक्‍फ बोर्ड अधि‍कारियों और अधिवक्‍ता को बुरी तरह से फटकार लगाई । कोर्ट ने ऑर्कियोलॉजिकल
सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के पक्ष में फैसले सुनाते हुए जिले की तीन एतिहासिक महत्‍व की संपत्तियों को वक्फ बोर्ड की जगह केंद्र सरकार के अधीन करने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान जस्‍टिस अहुलवालिया ने साफ कहा कि जो इमारतें देश की धरोहर की श्रेणी में आती हैं, वे केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग के अधीन होती हैं ।

इस मामले में ओपन सुनवाई के एक सप्‍ताह पश्‍चात वायरल हुए विडियों में स्‍पष्‍ट देखा जा सकता है कि जब वक्फ की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि वक्फ की संपत्ति से अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया जाए। तब जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने वक्‍फ बोर्ड के वकील से पूछा कि जिन पर आप अपना दावा कर रहे हो, उन तीन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजउ न्‍यायालय में प्रस्तुत करें। वक्‍फ इस पर फिर सफाई देता दिखा, ऐसे में जस्टिस अहलूवालिया ने ओपन कोर्ट में अपनी नाराजगी व्‍यक्‍त की । कोर्ट ने कहा कि प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 के तहत प्राचीन और संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है, तो उसे
वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि भा त में सेना और रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी है, जिसमें कि वक्‍त बीतने के साथ ही इसकी प्रॉपर्टी में लगातार इजाफा हो रहा है। कहीं भी अपना दावा प्रस्‍तुत करने वाले वक्‍फ बोर्ड को न्‍यायालय से अब झटका मिलना शुरू हो गया है। देश के कई राज्‍यों में जमीनों के मालिकाना हक एवं अन्‍य प्रॉपर्टी को लेकर विवाद पैदा करने वाले वक्‍फ बोर्ड को मध्य प्रदेश में पिछले माह दो बार मुंह की खानी पड़ी है। दोनों ही संपत्तियों पर वक्‍फ अपने खूब दावे प्रस्‍तुत करते हुए दिखाइ दिया है। इससे जुड़ा पहला मामला मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आया तो दूसरा यह बुरहानपुर का है ।

गौरतलब यह भी है कि एक तरफ न्‍यायालय में वक्‍फ बोर्ड को झटके पर झटका लग रहा है तो दूसरी ओर केंद्र सरकार वक्फ से जुड़े दो बिल संसद में लेकर आ रही है। एक बिल के जरिए मुसलमान वक्फ कानून 1923 को समाप्त किया जाएगा तो दूसरे बिल से वक्फ कानून 1995 में महत्वपूर्ण संशोधन होंगेहों गे। इस लाए जा रहे संशोधन बिल के माध्‍यम से सरकार 2024 में 44 संशोधन करेगी। सरकार ने कहा कि बिल लाने का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन है। इसमें वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जा रहा है जिसके तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार अब तक मिला हुआ है।

वक्‍फ बोर्ड ने तीनों संपत्‍त‍ियों को अपना बताया था
इस पूरे प्रकरण में वर्ष 2013 में बहुत ही होशियारी के साथ मप्र वक्‍फ बोर्ड ने एक आदेश जारी करते हुए इन तीनों ही साइटों को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था, जैसा कि पहले नियम था वक्‍फ के बारे में कि अपील भले ही, दलील कुछ भी हो, पर जो वक्‍फ कहे वही सही, लेकिन अब वक्‍फ की संपत्तियों से जुड़े दावों के बीच इससे जुड़ा दूसरा या तीसरा पक्ष न्‍यायालय की शरण में जा रहा है और वहां से उसे साक्ष्‍यों के आधार पर न्‍याय मिलना संभव हुआ है। इस मामले में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वा रा मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें कि एएसआई का पक्ष अत्‍यधिक पुष्‍ट पाया गया। यहां कोर्ट को बताया गया कि विवा दित तीन स्थल– शाह शुजा स्मारक, नादिर शाह का मकबरा एवं बुरहानपुर के किले में स्थित बीबी साहिबा की मस्जिद प्राचीन और संरक्षित स्मारक हैं। इनमें शाह शुजा स्मारक मुगल सम्राट शाहजहां के बेटे शाह शुजा की पत्नी बेगम बिलकिस की कब्र है। वर्ष 2013 में मध्‍य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक आदेश निकाल कर इन तीनों साइटों को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया था, जबकि प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 यह स्‍पष्‍ट करता है कि अति प्राचीन और संरक्षित स्मारक की श्रेणी में जिसे रखा गया है, वह उसी का हिस्‍सा रहेगा, ऐसे में वक्फ बोर्ड की संपत्ति इन्‍हें नहीं माना जा सकता।

एएसआई ने कोर्ट को बताया, क्‍यों नहीं है ये प्रॉपर्टी वक्‍फ की
एएसआई ने न्‍यायालय को बताया कि इन स्मारकों को उसके द्वारा कभी छोड़ा गया है, वही उसका लगातार संरक्षण कर रहा है, ऐसे में यह वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कैसे हो सकती है? फिर वक्‍फ बोर्ड की ओर से जवाब दिया गया कि जब उनके सीईओ ने संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दिया था तब बोर्ड के पास इसे खाली कराने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं था। इस पर जस्टिस जीएस अहलूवालिया की ओर से कहा गया कि इस संपत्ति के संबंध में गलत अधिसूचना वक्‍फ बोर्ड द्वारा जारी की गई। वक्फ बोर्ड की अधिसूचना इस विवादित बनाई गई संपत्ति पर केंद्र सरकार का स्वामित्व नहीं छीनेगी। इस प्रकरण की सुनवाई में जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने अंतिम आदेश पारित करते हुए तथ्‍यों के आधार पर स्‍पष्‍ट रूप से अपने दिए निर्णय में यह भी कहा, “विचाराधीन संपत्ति एक प्राचीन और संरक्षित स्मारक है, जो प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनि यम, 1904 के तहत विधिवत अधिसूचित है और इसलिए सीईओ, मध्‍य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने याचिकाकर्ता को इसे खाली करने का निर्देश देकर एक बड़ी अवैधता की है।”

ईरानी स्थापत्य शैली से बना यह मकबरा आज भी आकर्षण का केंद्र
उल्‍लेखनीय है कि बेगम बिलकिस की बेटी के जन्म देते समय मौत हो गई थी, जिसे बुरहानपुर में दफनाया गया था। ईरानी स्थापत्य शैली से बना यह मकबरा आज भी आकर्षण का केंद्र है। इसका आकार खरबूजे की तरह है। इसलिए इसे खरबूजा गुंबद भी कहा जाता है। इसके जर्जर होने के कारण 1970 में केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने इसे बंद कर दिया वर्ष 2020 में यह खोला भी गया था। मकबरे में आकर्षक रंगीन नक्काशी है। इस संबंध में कोर्ट का आया यह अंतिम आदेश 26 जुलाई को जस्टिस जीएस अहलूवालि या का है, जिसे कि 1904 प्राचीन स्मा रक संरक्षण अधिनियम के तहत इस स्मारक को विधिवत अधिसूचित किए जाने के बारे में भी बताया गया। था। मकबरा राष्ट्री य स्मारक के रूप में दर्ज है।

वक्‍फ को भोपाल में किए गए अपने दावे से हटना होगा पीछे
इससे पहले एक निर्णय भोपाल में आया और वक्‍फ बोर्ड को साफ बता दिया गया कि शासकीय भूमि पर कब्‍जा स्‍वीकार्य नहीं किया जाएगा। इसलिए वक्फ बोर्ड शासकीय भूमि से अपने अवैध कब्जे को शीघ्र हटाए। अब यहां वक्फ बोर्ड को हमीदिया रोड स्थित इसराणी मार्केट से किए गए अपने निर्माण को हटाना होगा । तहसीलदार ने इस संदर्भ में एक आदेश पारित किया है। इसमें कब्जा हटाने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है। इसके साथ ही भूमि के बाजार मूल्य से 20 प्रतशित अधिक राशि जमा कराने, शासकीय भूमि को मूल स्वरूप में लाने पर होने वाले व्यय की वसूली के लिए भी निर्देशित किया गया है।

इस मामले में शहर भोपाल में भूमि सर्वे नं. 520 एवं 522 कुल रकबा 3560 मद आबादी (गांवठान) प्रमुखता शासकीय भूमि है। अंशभाग 27000 वर्गफिट पर वक्फ बोर्ड ने औकाफ-ए-अम्मा के माध्यम से अवैध कब्जा करते हुए दुकान और फ्लैट का निर्माण कर दिया गया। शुरू में तहसील नजूल द्वारा पारित आदेश के पहले अनुमति प्राप्त भूमि के बदले दूसरे खसरा नम्बर की भूमि पर भवन निर्माण करने पर नगर निगम भी वक्फ बोर्ड को जबाव तलब कर चुका है। इस मामले में वक्‍फ सिर्फ अपने मौखिक दावे करता रहा, उसके पास कब्‍जाई गई भूमि के संबंध में कोई साक्ष्‍य नहीं मिले, जिससे कि उसे वक्‍फ का होना पाया जाता। ऐसे में यह निर्णय भी पूरी तरह से वक्‍फ के विरोध में आया है।

2013 में सोनिया-मनमोहन सरकार ने वक्फ बोर्ड को अपार शक्तियां दीं
वक्फ कानून-1995 बहुत ताकतवर बना है। कोई मुसलमान कहीं भी अवैध मजार या मस्जिद बना लेता है और एक अर्जी वक्फ बोर्ड में लगा देता है। बाकी काम वक्फ बोर्ड करता है। यही कारण है कि पूरे भारत में अवैध मस्जिदों और मजारों का निर्माण बेरोकटोक हो रहा है। वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन कब्जाने का षड्यंत्र 2013 के बाद तो और तेज हो गया है। 2013 में सोनिया-मनमोहन सरकार ने वक्फ बोर्ड को अपार शक्तियां दे दी थीं।थीं सोनिया-मनमोहन सरकार ने वक्फ कानून-1995 में संशोधन कर उसे इतना घातक बना दिया कि वह किसी भी संपत्ति पर दावा करने लगा है। भारत में सशस्त्र बल और रेलवे के बाद वक्फ
बोर्ड तीसरा सबसे बड़ा जमींदा मीं र है। वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार देश में वक्फ बोर्ड के पास फिलहाल 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं, जो कुल मिलाकर 8 लाख एकड़ से ज्यादा है।

वक्‍फ संपत्‍त‍िएवं कब्‍जे से जुड़ा जो बड़ा मामला बीते सालों में सबसे ज्‍यादा चर्चाओं में रहा वह तमिलनाडु प्रदेश के त्रिचि जिले के गांव में डेढ़ हजार हिन्‍दू आबादी से जुड़ा है, उसमें कुल और मात्र सात-आठ घर मुस्लिमों के हैं और पड़ोस में ही एक भगवान शंकर जी का मंदिर है जो डेढ़ हजार साल पुराना है। वक्फ बोर्ड ने उस गांव की पूरी संपत्ति पर अपना दावा ठोक दिया और सबको खाली करने का नोटिस कलेक्टर के यहां से पहुंचा दिया गया। कागजात से भी संपत्ति खारिज हो गई। इस गांव की अधिकतर आबादी गरीब है, ऐसे में जब इस गांव के हिन्‍दू लोग थक हार गए तो उन्हें एक ऑप्शन देते हुए मुस्लिम धर्म स्वीकार
करने के लिए कहा गया। इस्‍लामवादियों ने सुझाव दिया गया कि अगर वो ऐसा कर लेंगे तब उनकी जमीन बच जायेगी।

ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का बहुत चर्चाओं में रहा है, जहां एक बस्ती में 250 के करीब हिन्‍दू अनुसूचित जाति वर्ग के लोग निवासरत हैं,उनके पास एक नोटि स उनकी जमीन को खाली करने का आया कि वो जहां रह रहे हैं वो वक्फ बोर्ड की जमीन है। वो दर-दर भटकते रहे, लेकिन कहीं उनकी कोई सुनवा ई नहीं हो रही थी, तब उनको भी इस्लाम अपनाकर मुसलमान बन जाने का ऑफर दिया गया। यानी वक्‍फ बोर्ड का काम सि‍र्फ जमीनों तक सीमित मत मानिए, यह इन मामलों को देख-समझने के बाद बड़े स्‍तर मतान्‍तरण और मजहबीकरण से भी जुड़ा है।

अल्लाह के नाम पर दी गई संपत्‍त‍िका रखाव करता है वक्‍फ बोर्ड
वक्फ बोर्ड वो संस्था है जो अल्लाह के ना म पर दान में दी गई संपत्ति का रख-रखाव करता है। वक्फ अरबी भाषा के वकुफा शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ठहरना। इस्लाम में ये एक तरह का मजहबी बंदोबस्त है। मुसलमान जब अपनी किसी चल या अचल संपत्ति को जकात में देते हैं तो वह संपत्ति ‘वक्फ’ कहलाती है। इसके बाद उस व्‍यक्‍तिका जकात में दी गई संपत्ति पर कोई मालिकाना अधिकार नहीं रहता। उसे अल्लाह की संपत्ति माना जाता है और उसकी देख-रेख ‘वक्फ-बोर्ड’ करता है।

वह उसे किराए पर दे सकता है, उसका अन्‍य प्रकार से उपयोग कर सकता है, कहना होगा कि वक्फ बोर्ड उसे जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करता है। आज देश के हर राज्‍य में सुन्नी और शिया वक्फ हैं। इनका काम उस संपत्ति की देखभाल, और उसकी आय का मोमिनों (इस्‍लाम को माननेवालों)लोंके हित में इस्तेमाल करना है। देश में एक सेंटर वक्फ काउंसिल है और वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया है। इसके साथ ही देश भर में अभी कुल 30 वक्फ बोर्ड्स विभिन्‍न राज्‍यों में मौजूद हैं। सबसे पहले साल 1954 में नेहरू सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया था, जिसे आगे कांग्रेस की अन्‍य सरकारों ने बहुत ताकतवर बनाने का काम किया है।

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