
इंदौर में पिछले तीन महीनों में शहरवासियों के सहयोग से विकास के कुछ ऐसे काम हुए हैं, जो मिसाल बन गए हैं। इसमें इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह का बड़ा योगदान है। अब कलेक्टर ने एक नई पहल की है, जिसमें रेडक्रास और शहर की जनता के सहयोग से बच्चों के हास्पिटल चाचा नेहरू अस्पताल के कायाकल्प का बीड़ा उठाया है। इस अस्पताल के कायाकल्प पर लगभग चार से पांच करोड़ रुपए तक का खर्च आएगा। इसके पूर्व शहर में लगभग 4 से 5 करोड़ के विभिन्न कार्य हो चुके हैं।
शहर की तासीर
इंदौर की तासीर ही कुछ ऐसी है, बशर्ते इसे कोई लीड करें जब इंदौर प्रशासन का मुखिया ही यह कदम उठाएगा तो सफलता तो मिलना ही है। इंदौर कलेक्टर ने जब इंदौर जिले का पदभार ग्रहण किया था तब उन्हें कुछ ऐसे कामों की जानकारी लगी थी, जिनमें के सुधार की जरूरत थी। इसमें प्रमुख रूप से गोशाला, अस्पताल, श्मशान घाट की व्यवस्था सुधारने जैसे काम भी थे। ऐसे में कलेक्टर ने इंदौर के बिल्डरों, कॉलोनाइजरों से एक बैठक कर शहर के विकास में उनके सामने एक प्रस्ताव रखा तो सभी ने एक सुर में सहयोग करने का वादा किया और यह काम चल पड़ा।
कलेक्टर आशीष सिंह की पहल पर बाल संप्रेक्षण गृह इंदौर में 573400 रु. की लागत से पानी की टंकी, वाटर प्रूफिंग, बाउंड्री वाल, टीन शेड, चाइल्ड फ्रेंडली पेंटिंग, राजकीय बालसंरक्षण आश्रम इंदौर में 565000 की लागत से शौचालय का गेट, बाउंड्रीवाल, हेवी चैनल, भवन के चैनल गेट व अन्य काम किए गए हैं। विशेष गृह बालक में 893820 रु. की लागत से भवन की वाटर प्रूफिंग, कम्प्यूटर 3 सेट, कम्प्यूटर टेबल आदि की व्यवस्था की गई है। विशेष गृह बालिका में 506750 रु. की लागत से भवन पर पेंट, रिपेयरिंग आदि का कार्य किया गया है।
वहीं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र परदेशीपुरा में दिव्यांगजनों को लिम्बर्स एवं अन्य उपकरणों का निर्माण, सड़क मार्ग, कम्प्यूटर सिस्टम आदि की व्यवस्था हेतु 34,50,000 का प्रावधान करते हुए कार्य शुरू कर दिया गया। इसी प्रकार मानसिक रूप से अविकित बच्चों के लिए परदेशीपुरा स्थित बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं आवासीय सुविधा एवं रिनोवेशन के लिए 30,00,000 की व्यवस्था कर ये कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं। वहीं महेष दृष्टिहीन कल्याण संघ में 200 दिव्यांग बालिकाएं एवं शिक्षण प्रशिक्षण में स्पोट्र्स गार्डन विकसित करने और ट्रेक बनाने हेतु 10,00,000 का प्रावधान करते हुए काम शुरू कर दिया गया है।
इसी प्रकार निराश्रित सेवा आश्रम पितृत पर्वत पर 5 लाख की लागत से सोलर पेनल लगाने का आर्डर कर दिया गया है। 4 लाख रु. की लागत से राउ में दिव्यांगजनों के लिए तीन आवासीय भवन निर्मित किए गए हैं। आगामी शिक्षा सत्र से विद्यालय प्रारंभ हो जाएगा। दिव्यांगजनों का आर्किट रॉक बैंड बनाने के लिए समग्र हाल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए 5 लाख रुपए की मदद से कार्य प्रारंभ किया गया है।
मुक्तिधाम
शहर के 11 मुक्तिधाम जिनमें जूनी इंदौर, खजराना, रामबाग, गांधी नगर, तिलक नगर, छोटा बांगड़दा, मालवा मिल, भोरासला, बिजलपुर, कुम्हारखाड़ी, चितावद। इन सभी का सर्वे कर प्रत्येक पर 15 से 30 लाख की लागत से विकास कार्य किया प्रस्तावित है।
अब चाचा नेहरु की बारी
जिस तर्ज पर पहले जो काम हुए थे उसी तर्ज पर बच्चों का अस्पताल चाचा नेहरु भी बनेगा। लगभग चार से पांच करोड़ रुपए तक का खर्च इस पूरे प्रोजेक्ट में आना है। ज्यादातर सिविल वर्क किया जाना है। इस असप्ताल की चार माह के भीतर पूरी सूरत बदलने का बीड़ा इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने उठाया है।
कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है इंदौर के लोग, इंदौर के व्यापारी यहां के जनप्रतिनिधी सबसे अलग हैं। बस आप कोई जिम्मेदारी ले लो लोग कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ खड़े हो जाते हैं।
