कोरोना काल के बाद में हमने समय-समय पर यह प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए हैं जिसमें मार्शल आर्ट और लाठी प्रशिक्षण शामिल रहा है और उद्देश्य यही है कि अभी के माहौल को देखते हुए यह विलुप्त होते कौशल को हर एक महिला युवा बच्चे को यह कौशल आना चाहिए लाठी प्रशिक्षण का भी यही उद्देश्य है ताकि हमारी विलुप्त होती कौशल को पुनर्जीवित कर रहे है।
दरअसल 5 बर्षो से लेकर 65 वर्ष की मातृ शक्ति भावना बहुत जरूरी है आज के इस समय सभी उम्र की महिलाओं को अपनी आत्मा रक्षा जरूरी है ताकि वह बाजार या घर मे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके,इसमें कोई उम्र का बंधन नही है,150 से अधिक मातृ शक्ति ये प्रशिक्षण ले रही है, क्षेत्रीय पार्षद सोनिला मिमरोट भाटिया ने बताया कि इस क्षेत्र में नशा अपनी पैठ जमा चुका है और नशे के चलते कई परिवार उजड़ चुके हैं और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बच्चों को सही तालीम और आत्मरक्षा के गुण सिखाए जा रहे हैं जो आए दिन यहां पर नशे के चलते छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लग सके।
वर्षीय बुजुर्ग महिलाओं ने अपने कौशल का मंच पर प्रदर्शन भी किया वह इस कौशल शिविर में लाठी व जूडो कराटे का प्रशिक्षण लेने आ रही 65 वर्षीय पांचू कुमार की छाच की रहने वाले शांतिबाई का कहना है कि मोहल्ला ऐसा है कि उन्हें आत्म रक्षा सीखना पड़ रहा है, उन्होंने बताया कि जब से सरल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन वह पार्षद सोनिला मिमरोटला भाटिया शिविर लगा रहे हैं तब से वह प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं, जिसमे कराते,लाठी चलाना और आत्म रक्षा सिख रही है खास बात यह है कि शांतिबाई अपने दोनों पोतों को भी यहाँ प्रशिक्षण दिलाने के आ रही है।
वही कोच ने बताया कि बच्चे मोबाइल में लगे रहते हैं इस प्रशिक्षण से उन्हें दो से तीन घटे मोबाइल से दूर रखना और इसी के साथ उन्हें आत्मरक्षा भी सिखाया जा रहा है,विजय का कहना है कि करीब 150 से अधिक बच्चे महिलाओं को सेल्फ डिफेंस के गुर की टेक्निक दी जा रही है वह भी निःशुल्क,

