
शनिवार को इंदौर के कुटुंब न्यायालय में पांच खण्डपीठ में लोक अदालत के दौरान कुल 510 प्रकरणों की सुनवाई हुई।
इंदौर। शनिवार को कुटुंब न्यायालय इंदौर में आयोजित लोक अदालत में अनोखे प्रकरण आए। शादी के कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दंपती तलाक की अर्जी लेकर कोर्ट पहुंच गए। एक मामले में तो दंपती तलाक इसलिए लेना चाह रहे थे क्योंकि पत्नी सुहाग चिह्न नहीं पहनती थी। अन्य मामले ऐसे थे जिनमें रिश्तेदारों के हस्तक्षेप और वर पक्ष की मांग के कारण पत्नी ससुराल छोड़कर मायके रहने लगी और तलाक की मांग की।
कुटुंब न्यायालय में पांच खण्डपीठ में लोक अदालत के दौरान कुल 510 प्रकरणों की सुनवाई हुई। कुल 141 प्रकरणों को राजीनामा के द्वारा समाप्त करवाया गया। इनमें से 27 प्रकरण में पत्नी-पत्नी अलगाव छोड़ फिर एक साथ रहने को तैयार हो गए।
शादी के कई सालों बाद लेनदेन को लेकर विवाद
मूसाखेड़ी इंदौर निवासी 27 वर्षीय सोनिया का विवाह वहीं रहने वाले राजेश कुमार के साथ हुआ था। शादी के बाद एक बेटा हुआ जो अब चार वर्ष का है। पति शासकीय सेवा में है लेकिन शादी के बाद ससुराल पक्ष से लेन-देन को लेकर विवाद होने लगे। पत्नी परेशान होकर पुत्र के साथ मायके में जाकर रहने लगी। 2022 में प्रकरण कोर्ट में पहुंचा और तलाक मांगा गया। पति न्यायालय में आया तो न्यायालय ने समझाइश दी। न्यायाधीश संगीता मदान की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने साथ रहने का वादा किया और एक दूसरे को माला पहनाकर विवाद समाप्त किया।
कोर्ट की समझाइश के बाद फिर एक हुए
इंदौर के आंबेडकर नगर की रहने वाली सोनाली का विवाह बरखेड़ा भोपाल के चिंतन साहू से हुआ। 13 साल पहले विवाह हुआ और दोनों का आठ वर्ष का बेटा है। हालांकि शादी के बाद से ही दंपती में विवाद होने लगे। पति शिकायत करता था कि पत्नी सुहाग चिह्न नहीं पहनती। बात बिगड़ती गई और मामला कोर्ट में पहुंचा। तलाक चाहने वाले दंपती को कोर्ट ने समझाइश दी। पति से व्यवहार बदलने को कहा। आखिरकार दंपती पुत्र के भविष्य के लिए फिर से साथ रहने को तैयार हुए। दोनों को न्यायाधीश संगीता मदान ने माला पहनाकर विदा किया।
