
गुना में बुधवार को जिस बस में 13 यात्री जिंदा जले, उस सिकरवार ट्रैवल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस ट्रैवल्स की अलग-अलग रूटों पर 15 बसें दौड़ रही थीं। इनमें से 12 (जली बस भी शामिल) ऐसी हैं जिनके पास परमिट नहीं था। इन बसों का फिटनेस भी खत्म हो चुका है।
खास बात यह है कि बिना परमिट वाली दो बसों का उपयोग विधानसभा चुनाव में भी किया गया है। 12 साल पुरानी ये बसें भी मेंटेनेंस के अभाव में खटारा हो चुकी हैं। हादसे के बाद इस सभी बसों को प्रशासन ने अपने अंडर में ले लिया है।
सिकरवार ट्रैवल्स की बस में बुधवार रात करीब साढ़े 8 बजे हादसे के बाद आग लग गई थी, जिसमें 13 लोग जिंदा जल गए थे। 16 से ज्यादा झुलस गए हैं। जिनका इलाज गुना में चल रहा है। 4 घायलों को भोपाल रेफर किया गया है। यह बस गुना से आरोन की ओर जा रही थी, तभी सामने से आ रहे एक डंपर से बस की टक्कर हो गई। टक्कर लगते ही बस पलट गई और उसमें आग लग गई।
15 बसें, किसी भी बस का बीमा नहीं
दरअसल, गुना के रामप्रताप सिकरवार का परिवार सिकरवार बस सर्विस नाम से बसों का संचालन करता है। इनके पास 15 बसें होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह संख्या बढ़ भी सकती है। दैनिक भास्कर ने इन सभी बसों के रजिस्ट्रेशन की जानकारी जुटाई। एक भी बस का बीमा नहीं था। जब ये बसें खरीदी गईं, तब ही बीमा हुआ था। उसके बाद कभी भी बीमा नहीं कराया गया। एमपी ट्रांसपोर्ट की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार 15 बसों में से केवल 4 बसों के पास परमिट था, बाकी 11 बसें बिना परमिट के ही चल रही थीं।
फिटनेस खत्म, फिर भी सड़कों पर उतारीं बसें
इन 15 बसों की फिटनेस खत्म हो चुकी थी। कुछ की 4 वर्ष पहले, कुछ की 3 और कुछ की दो वर्ष पहले। यानी नियम अनुसार ये बसें सड़क पर नहीं चलाई जा सकतीं। इसके बाद भी बसों का संचालन किया जा रहा था। सैकड़ों सवारियां इनमें रोज सफर करती थीं। पिछले दो वर्षों से तो किसी भी बस का टैक्स नहीं चुकाया गया है। RTO विभाग को टैक्स जमा नहीं किया गया। यानी सरकार को भी चूना लगाया गया। सूत्र कहते हैं कि बिना विभाग की मदद के यह नहीं हो सकता कि एक दर्जन से ज्यादा बसें सड़कों पर बिना परमिट, बिना बीमा, बिना फिटनेस और बिना टैक्स दिए दौड़ती रहें।
सबसे पुरानी दो बसें भी चल रही थीं
पड़ताल में सबसे चौंकाने वाली यह बात सामने आई है कि सिकरवार ट्रैवल्स की ज्यादातर बसें 12 से 13 साल पुरानी थीं। इनमें से कुछ बसें 17 से 18 साल पुरानी हैं। इन बसों को 4 से 5 साल पहले ही हटा लेना था। परिवहन विभाग के पोर्टल के मुताबिक इनमें से 5 बसें 2006 में रजिस्टर्ड हुई थीं, जबकि दो बसें 2008 में आरटीओ के साइट पर अपडेट हुईं।

छह बसें जब्त, बाकी गायब
बुधवार को हादसे के बाद पुलिस ने बस मालिक के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। हादसे के अगले ही दिन परिवहन विभाग ने इस परिवार द्वारा संचालित बसों की धरपकड़ शुरू कर दी। विभाग छह बसें ही पकड़ पाया, जबकि बाकी बसें उन्हें नहीं मिली। छह बसों को जब्त कर पुलिस लाइन में खड़ा करा दिया गया है। विभाग और पुलिस बाकी बसों की जानकारी जुटाने में लगी है। बस मालिक रामप्रताप सिकरवार भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में भी लगी है।
स्व. बाबू सिंह ने शुरू की थी सिकरवार बस कंपनी
सिकरवार बस कंपनी की शुरुआत स्व. बाबू सिंह सिकरवार ने की थी। उनके पांच पुत्र हैं। विजय प्रताप सिंह, राम प्रताप सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह, श्याम प्रताप सिंह और भानू प्रताप सिंह। 15 बसों में से कुछ बसें इनके नाम हैं। पूरा परिवार इसी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। शहर के जज्जी बस स्टैंड के सामने उनका ऑफिस है।
पुलिस के पास केवल चालान का अधिकार: DSP ट्रैफिक
ट्रैफिक DSP मनोज वर्मा ने बताया कि पुलिस के पास ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होने पर बस समन शुल्क वसूलने के अधिकार है। यह राशि बहुत कम होती है। पुलिस भारी-भरकम जुर्माना नहीं कर सकती। बड़ी कार्रवाई करने का अधिकार परिवहन विभाग और कोर्ट के पास है।
एक अन्य ट्रैफिक अधिकारी ने बताया कि वह अधिकतम 3 हजार का चालान ही बना सकते हैं। इसी का फायदा बस संचालक उठाते हैं। परिवहन विभाग ज्यादा कार्रवाई करता नहीं है, इसलिए पुलिस से ये बस संचालक डरते भी नहीं हैं।

अब इंश्योरेंस एक्सपर्ट से समझिए बीमा क्यों जरूरी है…
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल पीड़ितों को मुआवजे का है। CM ने मृतकों के परिवार वालों को 4-4 लाख और घायलों को 50-50 हजार का मुआवजा देने का ऐलान किया है। घायलों को मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन ने प्रकरण तैयार कर भोपाल भेज दिए हैं, लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बस मालिक के बारे में उठ रहा है। उसकी भी जिम्मेदारी बनती है। इंश्योरेंस एक्सपर्ट सीनियर एडवोकेट प्रशांत सिसोदिया से जाना कि बीमा क्यों जरूरी है और पीड़ितों को इससे क्या फायदा हो सकता है
- बीमा क्या होता है?: बीमा थर्ड पार्टी होता है। थर्ड पार्टी मतलब जो आम आदमी है। बीमा एक एग्रीमेंट होता है, जिसमें फर्स्ट पार्टी बीमा कंपनी और सेकेंड पार्टी बस मालिक होता है, जो बीमा कराता है। उसमें थर्ड पार्टी की लाइबिलिटी के लिए बीमा कराया जाता है। कोई भी वाहन रोड पर आ रहा है तो कानूनन उसका बीमा होना जरूरी है।
- इस मामले में बीमा नहीं था, अब क्या होगा?: हां, यह सही है कि इस मामले में बीमा नहीं था, लेकिन तब भी बस मालिक को भुगतान करना पड़ेगा। जो भी कम्पनसेशन (क्षतिपूर्ति) कोर्ट निर्धारित करेगा, उसका भुगतान बस मालिक को करना पड़ेगा। क्लेम का पूरा केस कोर्ट में जाएगा। कोर्ट में यह सब निर्धारित होगा। कोर्ट सारे तथ्यों पर विचार करते हुए मुआवजा/क्षतिपूर्ति राशि तय करेगी।
- अगर मालिक के पास उतनी संपत्ति न हो तो?: कोर्ट जो क्षतिपूर्ति तय करेगी, उतनी संपत्ति अगर मालिक के पास नहीं है, तो फिर कानून में रिकवरी के लिए प्रावधान हैं। कोर्ट यह आदेश कर सकती है कि मालिक की जो संपत्ति है उसे राजसात कर बेच दिया जाए। उसे बेचकर पीड़ित पक्ष को क्लेम दिया जा सकता है। बाकी अगर संपत्ति नहीं है तो कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि क्लेम दूसरी जगह से दिया जाए। क्लेम सिर्फ मालिक की संपत्ति पर ही निर्भर करता है।
- अगर बस का बीमा होता, तो पीड़ितों को कितना क्लेम मिलता?: जिस तरह से ये घटना हुई है, इसमें कुछ सरकारी कर्मचारी हैं, कुछ किसान हैं, कुछ बच्चे, कुछ लेबर क्लास हैं। ये कोई मामूली घटना नहीं हैं। 13 लोगों की जलकर मौत हुई है। इस तरह के मामलों में कोर्ट के पूर्व के कुछ आदेश देखें और उस हिसाब से अगर अंदाजा लगाएं तो घायलों और मृतकों को 8-10 करोड़ का क्लेम मिलना चाहिए।
- बीमा कंपनी भुगतान कर सकती है?: इस मामले में तो बीमा है ही नहीं। अगर कोर्ट यह डिसाइड कर दे कि बीमा किसी पार्टी के पास है, लेकिन वाहन का परमिट नहीं है, फिटनेस नहीं है या उसके पास वाहन के स्वरूप अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, तो ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी थर्ड पार्टी यानी जो पीड़ित पक्ष होता है, उसे भुगतान कर देती है और मालिक से वसूल करती है।

एक नजर में बस हादसा और कार्रवाई…
- 27 दिसंबर 2023: मध्यप्रदेश के गुना में बुधवार को रात आठ बजे डंपर से टक्कर के बाद यात्री बस में आग लग गई थी। हादसे में 13 लोग जिंदा जल गए थे। 11 शव बस के अंदर जबकि दो गेट के पास मिले थे। शवों की हालत ऐसी है कि मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। 16 लोग झुलस गए थे।
- 28 दिसंबर 2023: गुना जिला अस्पताल में गुरुवार सुबह डॉ. ध्रुव कुशवाह, डॉ. सुनील दांगी, डॉ. सतीश सिनोरिया, डॉ. महेंद्र सिंह किरार और डॉ. कमल सिंह मीणा के पैनल ने शवों का पोस्टमॉर्टम किया। शव की शिनाख्त के लिए DNA जांच कराई जाएगी। 6 शव गुना के जिला अस्पताल, 7 शिवपुरी अस्पताल भेजे गए हैं। DNA जांच रिपोर्ट के आधार पर शवों की शिनाख्त कर परिवार वालों को सौंपा जाएगा।
- 28 दिसंबर 2023: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे गुना जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश पर अपर जिला दंडाधिकारी मुकेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गई। मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।
- 28 दिसंबर 2023: गुना कलेक्टर तरुण राठी और एसपी विजय कुमार खत्री के साथ ही परिवहन आयुक्त संजय कुमार झा को हटा दिया है। कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार जिला पंचायत सीईओ प्रथम कौशिक को सौंपा गया। RTO रवि बरेलिया को सस्पेंड कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड देर से पहुंचने के कारण CMO (चीफ म्यूनिसिपल ऑफिसर) बीडी कतरोलिया को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

