
हर मंच पर भले ही बूंद-बूंद पानी बचाने की बात हो रही है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी की कई तहसीलों में बूंद-बूंद भूजल दोहन करने की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली की 34 तहसीलों में से सिर्फ पांच ही सुरक्षित और चार कम खतरे वाली हैं। बाकी के 25 में 12 तहसीलें भूजल दोहन के मामले में खतरे वाली व 13 अति दोहित हैं।
खतरे वाली और अति दोहित क्षेत्र का कुल भूभाग दिल्ली की करीब 62 प्रतिशत है। जल शक्ति मंत्रालय की केंद्रीय भूजल संसाधन आकलन रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली जिले की तीनों तहसीलों में भूजल दोहन का स्तर बेहद खराब है। साथ तीन जिलों की तीन-तीन तहसीलों में से दो-दो भी इसी स्थिति में हैं।
वर्ष 2023 के आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की करीब 74 प्रतिशत भूमि से भूजल दोहन काफी हो रहा है। सिर्फ 14 प्रतिशत के आसपास जमीन में भूजल की स्थिति ठीक है। जिन जो पांच तहसीलों की करीब 330 वर्ग किमी जमीन जहां भूजल सुरक्षित हैं, उसमें दक्षिण पश्चिम, मध्य की एक-एक, उत्तर पश्चिम की दो तहसील और नजूल भूमि की एक यूनिट है।
कम खतरे वाली ये हैं जगहें
कम खतरे वाली यूनिटों की बात करें तो उत्तर की अलीपुर, उत्तर पश्चिम की सरस्वती विहार, पश्चिम की पंजाबी बाग व उत्तर पूर्वी दिल्ली सीलमपुर तहसील है। यह दिल्ली की कुल जमीन का लगभग 233 वर्ग किमी है। इसमें सबसे बड़ा भूभाग अलीपुर का है।
दक्षिण पूर्वी जिले में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर
राजधानी की खतरे वाली आठ जिलों की 12 तहसीलें हैं। इनमें उत्तर की माडल टाउन, दक्षिण पश्चिम की द्वारका, दक्षिण की हौज खास, मध्य की कोतवाली, पश्चिम की पटेल नगर, शहादरा की सीमापुरी, दक्षिण पूर्व की कालकाजी, डिफेंस कालोनी व सरिता विहार और पूर्व की गांधी नगर, मयूर विहार, प्रीत विहार तहसीलें शामिल हैं। इसमें पूरा दक्षिण पूर्वी जिले में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर है। यह पूरा क्षेत्र 103 वर्ग किलोमीटर का है। वहीं, पूर्वी जिला का क्षेत्र 31 वर्ग किमी का है। यह पूरा क्षेत्र राजधानी की 20 प्रतिशत भूमि है।
भूजल दोहन में नई दिल्ली की राह पर उत्तर पूर्वी, दक्षिण व शाहदरा
जरूरत से काफी ज्यादा भूजल दोहन के मामले में सात जिलों की 13 तहसीलें दिल्ली की स्थिति को और खतरनाक बना रही हैं। इसे रिपोर्ट में अति दोहित श्रेणी में रखा गया है। इसमें सबसे अव्वल नई दिल्ली जिला है, यहां की तीनों तहसीलों चाणक्यपुरी, वसंत विहार व दिल्ली कैंट में भूजह दोहन की यही रफ्तार रही तो भविष्य के लिए भूजल ही नहीं बचेगा। यह पूरा क्षेत्र करीब 158 वर्ग किलोमीटर का है।
इसके साथ ही उत्तर पूर्वी, दक्षिण व शाहदरा की प्रत्येक तीन तहसीलों में से दो-दो तहसीलें इसी राह पर हैं। इनमें उत्तर पूर्वी की यमुना विहार व करावल नगर, दक्षिण की मेहरौली व साकेत और शाहदरा जिले की विवेक विहार व शाहदरा तहसील शामिल है। इसके अलावा मध्य जिले की करोल बाग, उत्तरी की नरेला, दक्षिण पश्चिम की कापसहेड़ा और पश्चिम की राजौरी गार्डन तहसील भी इसी श्रेणी में हैं। यह पूरा क्षेत्र करीब 617 वर्ग किमी क्षेत्र है, जो दिल्ली की भूमि का 41 प्रतिशत हिस्सा है।

