
विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) ने जिस सरंपच को रिश्वत कांड में पकड़ा, उसे तीन महीने पूर्व भी नहीं हटा सकी थी। लोकायुक्त द्वारा भेजा पत्र भी जिला पंचायत और एसडीओ कार्यालय से गायब हो गया। ग्राम पंचायत सिंहासा के सरपंच नारायण चौहान को लोकायुक्त ने 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। मछली पालन केंद्र चलाने के एवज में 80 हजार रुपये मांग रहे नारायण पर भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया और पद से हटाने के लिए जिला पंचायत सीईओ को पूरी रिपोर्ट भेज दी। एफआइआर के साथ भेजे पत्र में पद से हटाने की सिफारिश की गई। जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 27 अक्टूबर को लोकायुक्त की एफआइआर और पत्र मल्हारगंज अनुभाग के अनुविभागीय अधिकारी को भेजा, मगर इसके बाद सारे पत्र दबा दिए। कमाल की बात यह कि एफआइआर के बाद बड़े अधिकारियों को पद से हटा देने वाली लोकायुक्त पुलिस भी इस मुद्दे पर खामोश रही।
