दिल्ली शराब नीति मामले की आंच केजरीवाल तक, राजनीति किस तरह बदलेगी?
दिल्ली का कथित लिकर स्कैम इन दिनों ख़बरों में लगातार है. इस केस में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह, सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में हैं.

दिल्ली का कथित लिकर स्कैम इन दिनों ख़बरों में लगातार है. इस केस में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह, सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में हैं. कल ही सुप्रीम कोर्ट से मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका भी खारिज हुई. पर शाम होते होते एक और ख़बर आई. इसी केस में अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED ने 2 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है. वैसे पहले भी इस केस में सीबीआई केजरीवाल से पूछताछ कर चुकी है. केजरीवाल की इस केस में एंट्री किस तरह से हुई, ईडी उनसे किन पॉइंट्स पर पूछताछ कर सकती है और इस समन के राजनीतिक मतलब क्या हो सकते है
सुप्रीम कोर्ट में आज एक सुनवाई होनी है. इस मामले पर कि राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए बनाई गई इलेक्टोरल बॉन्ड व्यवस्था समस्याजनक है या नहीं. सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने जवाब भी दिया. सुप्रीम कोर्ट में जो केंद्र सरकार का पक्ष रखते हैं, यानी देश के सॉलिसीटर जनरल उनका कहना है कि किसी राजनीतिक दल को मिलने वाले चंदे की जानकारी पाना नागरिकों का मौलिक अधिकार नहीं है. इसलिए इलेक्टोरल बॉन्ड के सिस्टम को ये कह कर नहीं खारिज किया जा सकता कि उससे दिए गए चंदे की जानकारी लोगों को नहीं मिल पाती. उन्होंने ये भी कहा कि ये मामला जूडिशियरी का विषय नहीं है, बल्कि नीतिगत है. अटार्नी जनरल का ये कहना था सुप्रीम कोर्ट किसी कानून में तभी दखल देता है, जब वह नागरिकों के मौलिक या कानूनी अधिकारों का उल्लंघन कर रहा हो. इस मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता.
केंद्र सरकार के इस जवाब के बाद आज चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की कांस्टीट्यूशनल बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी. सवाल है कि राजनीति में जब पारदर्शिता पर इतनी बात हो रही है, धन और बाहुबल का खेल अब तक चुनावी राजनीति पर हावी है ऐसे में केंद्र सरकार के इस जवाब कि नागरिक राजनीतिक दलों को मिले चंदे के बारे में जान ही नहीं सकते– इसका आधार क्या है और सरकार का ऐसा जवाब इस मामले की सुनवाई पर किस तरह असर ड़ालेगा? ‘आज का दिन’ में सुनने के लिए क्लिक करें.
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प्याज के बढ़ते दाम हमेशा से देश की सियासत से लेकर आम आदमी की जेब पर भारी होते रहे हैं. इन दिनों भी ऐसा ही कुछ हुआ है. बीते कुछ दिनों में दिल्ली समेत कई राज्यों में अचानक प्याज की कीमतों में तेजी आई है. दिल्ली में कल प्याज 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका. और गाजीपुर मंडी में ये 40 से 50 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. और ये आलम सिर्फ राजधानी का नहीं है. राजस्थान के जयपुर, चंडीगढ़,भोपाल में भी दाम यही हैं. मुंबई और लखनऊ की मंडियों में ये 70 से 75 रुपए है. दीवाली निकट है और पकवान प्रेमी नहीं चाहेंगे कि दीवाली में प्याज की ये महंगाई भी उनके राह में आए. इस बढ़ोतरी की वजह क्या है और सरकार के पास कुछ हल है क्या?

28 सितंबर, सोमवार
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