सरकार द्वारा शहरी भूमि सीमा अधिनियम 1976 को दिनांक 17 फरवरी 2000 को समाप्त कर दिया था और शासकीय अधिकारियों को निर्देशित किया की सरकारी कब्जे की भूमि को चिन्हित करें ,सूचना पत्र लगाकर तार फेंसिंग करें तथा ऐसी भूमिया जो निजी, किसने व्यक्तियों संस्थाओं के पास है उन्हें सीलिंग मुक्त माने ,,वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने सवाल उठाया है कि सीलिंग अधिनियम को लेकर बड़ा झोल है, द्विवेदी ने बताया कि नियमों का मखौल उड़ाते हुए अधिकारियों ने भू माफियाओं के साथ मिलकर खेल खेला है,, शहर में 400 से ज्यादा कॉलोनियों के हजारों मकान क्या अवैध है,, साथ ही उन्होने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे विधनसभा चुनाव के बाद इस मुद्दे को मय प्रमाण और प्रभावी तरीके से सामने लाएंगे,
