
इन दिनों अपराध शाखा का माहौल बदला-बदला है। एक वक्त था जब पुलिसकर्मी थाना छोड़कर क्राइम ब्रांच में जाने की जुगत में लगे रहते थे। क्राइम ब्रांच में समय की पाबंदी नहीं होती। वर्दी धारण करने से भी मुक्ति मिल जाती है। पूरे शहर पर राज करते वो अलग। लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है। यहां पदस्थ पुलिसकर्मी थाने पर पोस्टिंग मांग रहा है। आयुक्त मकरंद देऊस्कर और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेश हिंगणकर रोजमर्रा के कार्यों में कतई हस्तक्षेप नहीं करते। उपायुक्त निमिष अग्रवाल ईमानदार अफसरों में गिने जाते हैं। हरेक पुलिसकर्मी के कार्यों पर नजर भी रखते हैं। जरा सी गड़बड़ी मिलते ही समंस-वारंट लेकर बाहर रवाना कर देते हैं। मनमर्जी पर पहरा होने के कारण पुलिसकर्मियों का मन भरने लगा है। हालांकि अफसर उन आवेदनों को भी तवज्जो नहीं देते जो बगैर ठोस कारण क्राइम ब्रांच से हटने के लिए आए हैं।
