
“इन्दौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित हुई जमीन तक को नहीं छोड़ा”
गांधीनगर स्थित सिद्धार्थनगर में एक प्लाट कई लोगों को बेचने के मामले में गत दिनों सुर्खियों में रहा सिद्धार्थनगर का शातिर कॉलोनी नाइजर हरीश तोलानी एक बार फिर सुर्खियों में है,इस बार सिद्धार्थ नगर नहीं बल्कि बाहुबली नगर की सरकारी जमीन को हथियाने के मामले में तोलानी का नाम सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार गांधीनगर स्थित सुपर कॉरिडोर चौराहे से कुछ ही दूरी पर एक सरकारी जमीन है…जिसपर तोलानी ने हाल ही में कब्जा किया है। इसपर मेट्रो का पावर सप्लाय स्टेशन बनना था,लेकिन तोलानी ने इसपर तार फेंसिंग कर कब्जा कर लिया है। बताते हैं,कि इससे लगती हुई जमीन पर ही सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहना योजना को लेकर कार्यक्रम किया था इसी जमीन के पीछे वाले हिस्से को तोलानी ने हथिया लिया है…ऐसे में अब मेट्रो के पावर सप्लाय स्टेशन को लेकर अब अटकलें सामने आने वाली है। अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने की स्थित में नहीं है,क्योकि तोलानी को राजनीतिक संरक्षण भी मिला हुआ है। इसी के चलते तोलानी राजनीतिक रसूख और अधिकारियों से सांठगांठ कर अपना काला साम्राज्य खड़ा कर धंधा चमका रहा है। तोलानी मामले पर पुलिस और प्रशासन का रवैया यह है,कि पीड़ितों के मय दस्तावेज शिकायतों के बाद भी ना तो पुलिस कार्रवाई कर रही है…न ही प्रशासन कारगर कदम उठा रहा है। यही वजह है,कि तोलानी के हौसले और बढ़ रहे है।

फिलहाल तो मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित हुई सरकारी जमीन पर कब्जा करने का मामला सामने आने से ही सभी को चौका दिया है,आखिर तोलानी इतनी हिम्मत कहां से जुटा रहा है। ये सवाल हर किसी के जहन में आ रहा है। लेकिन सरकारी जमीन पर आखिर तोलानी ने कब्जा कर लिया और प्रशासनिक अधिकारी भी मौन है। इस सवाल पर ही अब सवाल खड़े हो रहे है। सूत्र बताते हैं,कि मामला मंत्री तुलसीराम सिलावट तक भी पहुंचा था। जिसके बाद मंत्री जी ने भाजपा नेता जगदीश चौकसे और अन्य पीडि़तों को मिलने भी बुलवाया था। और वही मंत्री सिलावट ने पीडि़तों के सामने तोलानी से किसी भी प्रकार के रिश्ते और समर्थन देने की बात से अपना पल्ला झाड़ लिया था इधर मीडिया की मुहिम का ही असर रहा की कई पीडि़तो को एक के बाद एक तोलानी ने प्लाटों के पजेशन दे दिए । हालांकि अब तोलानी का बाहुबली नगर स्थित सरकारी जमीन पर कब्जा करने और उसपर कॉलोनी काटने का सपना लगभग सच होता दिख रहा है,वो इसलिए क्योंकि अभी – तक मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित हुई सरकारी जमीन को तोलानी की अवैध तार फेंसिंग से शासन और प्रशासन मुक्त नहीं करा पाया है।
