
आनलाइन सट्टे की लत लगाकर कंपनियां युवाओं का भविष्य चौपट कर रही हैं। उन्हें पैसा कमाने का लालच दिया जाता है। इसके लिए प्रसिद्ध लोगों से विज्ञापन करवाए जाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को लुभाया जा सके। चिंता की बात यह है कि आनलाइन कंपनियों पर लगाम कसने के लिए कोई कानून नहीं है। लगाम जरूरी है ताकि देश का भविष्य बरबाद न हो।
यह मांग की गई है उस जनहित याचिका में जिस पर मंगलवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हो गई है। याचिका एडवोकेट विनोद द्विवेदी ने लगाई है। वे स्वयं ही इसमें पैरवी कर रहे हैं। याचिका में पूर्व में भी सुनवाई हो चुकी है लेकिन उस वक्त कोर्ट ने कहा था कि याचिका में उन प्रसिद्ध व्यक्तियों को भी पक्षकार बनाया गया है जो इन कंपनियों के लिए विज्ञापन करते हैं, जबकि हमारे देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत किसी व्यक्ति को किसी वस्तु या उत्पाद का विज्ञापन करने से रोका जा सके। इस पर याचिकाकर्ता ने इन नामी लोगों के नाम याचिका में से हटा दिए।
