
चीफ वार्डन को बचाने के लिए कुलपति ने वार्डन को दोबारा जिम्मेदारी देने से किया इन्कार। पं. रामाबाई गर्ल्स होस्टल से हटाई गई वार्डन डा. सुनीता गौर के समर्थन में छात्राएं उतर आई है। दोबारा वार्डन बनाए जाने को लेकर छात्राओं ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। करीब 72 छात्राओं ने वार्डन के समर्थन में कई बातें भी लिखी हैं। पूरे मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रनेता कुलपति डा. रेणु जैन से मिले तो उन्होंने वार्डन को वापस होस्टल की जिम्मेदारी देने से इन्कार कर दिया है। उधर, छात्र नेताओं ने कुलपति पर अपने करीबियों को बचाने का आरोप भी लगाया।
दरअसल होस्टल की अव्यवस्थाओं को लेकर पांच जनवरी को छात्राओं ने चीफ वार्डन कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान कुछ छात्राओं और चीफ वार्डन डा. नम्रता शर्मा के बीच विवाद हो गया। मामला झूमाझटकी तक पहुंच गया। इस पर छात्राओं ने चीफ वार्डन पर बाल खिंचने और हाथपाई करने का आरोप लगाया। एबीवीपी ने चीफ वार्डन को हटाने की मांग की। साथ ही होस्टल की व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया। चार सदस्यीय समिति को जांच करने में महीनेभर का समय लगा। उसके बावजूद चीफ वार्डन को क्लीनचीट दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, कुलपति डा. रेणु जैन ने होस्टल का निरीक्षण किया, जिसमें चीफ वार्डन के कहने पर होस्टल वार्डन को हटा दिया, क्योंकि प्रदर्शन के दौरान वार्डन डा. सुनीता गौर ने होस्टल के सुधार व मेंटेनेंस से जुड़े कार्यों की फाइल चीफ वार्डन द्वारा रोकने की बात कहीं थी। बावजूद चीफ वार्डन पर कुलपति ने मेहरबानी करते हुए वार्डन को हटा दिया। तर्क दिया गया है कि वार्डन अपने 18 वर्षीय बेटे के साथ होस्टल परिसर में रहती है।
पूरे मामले में एबीवीपी के छात्र नेता भी गुस्साएं है। कुलपति से मिलने के दौरान उन्होंने कहा कि वार्डन सिंगल पैरेंट है। बेटा होस्टल परिसर में नहीं रह सकता है तो वार्डन को विश्वविद्यालय में कहीं दूसरे स्थान पर मकान आवंटित किया जाएगा। होस्टल से हटाना कहां तक सही है। फिलहाल कुलपति दोबारा वार्डन को होस्टल की जिम्मेदारी देने से माना कर दिया।
