
- मुख्य वक्ता के रूप में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संगठक श्री सतीश कुमार जी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव जी एवं श्रीमती शोभा ताई पैठनकर रहे।
- कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डॉ. रेणु जैन द्वारा की गई।
- स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति का उद्देश्य
- स्वदेशी उत्पादों एवं स्वदेशी जीवन शैली के प्रति आम नागरिकों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
श्री सतीश कुमार जी ने अपने वक्तव्य में कहा सजीव जी का नाम स्वदेशी के साथ जुड़ गया। स्वदेशी सुनते ही लोगों के मन में राजीव दीक्षित जी का नाम आता है। 1992 के आस पास जब राजीव जी ने स्वदेशी आंदोलन को प्रखर किया तो वो भारत के लिए एक नई स्वतंत्रता की शुरवात थी। और आज भारत अपनी पूर्ण स्वतंत्रता की तरफ बढ़ रहा है। लालबाग में लगी दो अंग्रेजों (विक्टोरिया और हेमिल्टन) की मूर्तियां भी हटना चाहिए। विदेशी आक्रमणकारियों ने धर्मपरिवर्तन और देश को लुटा पर अंग्रेजों ने यहां की अर्थव्यवस्था को, शैक्षणिक ढांचे को बदल कर भारत का भविष्य बदलने का षड्यंत्रकारी काम किया। दीनदयाल जी ने 1960 में स्वदेशी की भावना को समझा और भारत के आर्थिक तंत्र से जोड़ा तथा इसको आगे दत्तोपंत ढेंगड़ी जी ने आगे बढ़ाया और बेहतर ढंग से राजीव दिक्षित जी ने आगे बढ़ाया।

कुलपति डॉ. रेणु जैन जी ने अपने वक्तव्य में संस्था विश्वम को अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने का आशीर्वाद प्रदान किया तथा भारत को हम इंडिया न कहकर भारत ही कहे इस बात का संकल्प लेने की अपील की।
ताई शोभा पैठनकर जी ने अपने वक्तव्य में स्वदेश एवं स्वदेशी को अपनाने वाले बन्धुओं को धन्यवाद प्रेषित किया तथा आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी भारत बनने का दृढ़ विश्वास एवं इच्छा प्रकट की।
श्री पुष्यमित्र भार्गव जी ने अपने वक्तव्य में स्वदेशी के भाव जागृत करने वाले सभी सम्माननियों को धन्यवाद प्रेषित किया तथा राजीव भाई जी के भाषणों को वर्तमान स्थिति एवं युवाओं के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्ष श्री पारस जैन जी ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुकों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
श्री केशव जी गुप्ता ने संस्था विश्वम की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्यों जैसे विदेशी संस्कृति का त्याग, संपूर्ण सनातन समाज को एकजुट करना, पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रभावी कार्य करना, गौसेवा के प्रति जागरूकता लाना, गौशाला का विकास करना आदि लक्ष्यों तथा संस्था की कार्यप्रणाली से परिचय करवाया।
सभी अतिथियों एवं आगन्तुकों का आभार श्री राकेश जैन जी ने व्यक्त किया।

