
ऑस्ट्रेलिया में खरगोशों की तादाद करीब 20 करोड़ के आसपास हो गई है। जो देश के लिए एक नई आपदा बन गए हैं। दरअसल, खरगोश ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय जीव नहीं हैं। इन्हें वहां इनवेसिव स्पीशिज माना जाता है। इन खरगोशों के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने की कहानी बड़ी दिलचस्प है।
यह बात है 1859 की। 25 दिसंबर क्रिसमस में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न बंदरगाह पर इंग्लैंड से एक जहाज आया। इसमें थॉमस ऑस्टिन नाम के एक व्यक्ति के लिए क्रिसमस के तोहफे में 24 खरगोश आए थे। ऑस्टिन इंग्लैंड के रहने वाले थे और मेलबर्न आकर बस गए थे। वे अपने कंपाउंड में बहुत सारे खरगोश पालना चाहते थे। लिहाजा उनके भाई ने इंग्लैंड से यूरोपीय खरगोश उपहार में भेजे थे। इसमें जंगली और पालतू दोनों तरह के खरगोश थे।

ऑस्टिन की चाहत पूरी हुई। इन खरगोशों से 3 साल में हजारों खरगोश पैदा हुए। अब ये खरगोश फसलों और स्थानीय पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में बेहिसाब जनसंख्या बायोलॉजिकल इनवेजन की सबसे विनाशकारी मिसालों में से एक है। इसे बाहर से लाए गए स्तनधारी जीवों का सबसे तेज रफ्तार से हुआ कोलोनाइजेशन माना जाता है। इससे ऑस्ट्रेलिया को सालाना करीब 1,600 करोड़ रुपए का कृषि-संबंधी नुकसान होता है।
100 किमी प्रति वर्ष फैली इन खरगोशों की आबादी
हाल ही में हुए शोध में सामने आया कि ऑस्टिन को भेजे गए खरगोशों को मेलबर्न पहुंचने में जहाज में 80 दिन लगे। इस दौरान दोनों तरह के खरगोशों में इंटरब्रीडिंग हुई। लिहाजा 100 किमी प्रति वर्ष की दर से ये खरगोश फैलते गए। 50 साल में वो 13 गुना बड़े इलाके में फैल गए।

