
निरुक्त भार्गव, उज्जैन – जिस ‘युग-युगीन’ उज्जयिनी में आकर भारतवर्ष के “वीवीआईपी” व्यक्ति स्वयं को धन्य मानते हैं, वो किस कारण यहां रात्रि विश्राम करने से बचते हैं? क्या इसके पीछे कोई तर्क है, कोई शास्त्रीय या शासकीय परम्परा है अथवा इसके पीछे कोई रहस्य छिपा है…?
18/11/2021 को उज्जैन में उस प्रसंग की चर्चा फिर से छिड़ गई जिसमें मान्यता है कि चूंकि महाकालेश्वर यहां के राजा हैं इसलिए शासन, प्रशासन वगैरह के शीर्षस्थ व्यक्ति शहर सीमा में रात्रि विश्राम नहीं किया करते! ताजा घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति यानी सीजेआई नुथालापति वेंकटा रमणा की गुरूवार को हुई उज्जैन यात्रा से जुड़ा है. उनके उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करने की एकाएक सूचना आते-ही प्रशासनिक क्षेत्रों सहित न्यायिक क्षेत्र में भी उक्त मान्यता को लेकर चर्चा फिर से गर्म हो गई!
सीजेआई का जो मूल कार्यक्रम था, उसके मुताबिक गुरूवार को उनको सड़क मार्ग से उज्जैन पहुंचना था और फिर महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करके रात्रि विश्राम यहीं करना था. उनके स्टे के लिए क्षिप्रा नदी के दूसरी तरफ बनी एक निजी होटल में इंतज़ाम किए गए थे. वे समय पर यहां पहुंच भी गए और महाकालेश्वर मंदिर की संध्या आरती में शरीक भी हुए. इसके बाद वे सपत्नीक हरसिद्धि मंदिर और काल भैरव मंदिर भी गए और पूजा-अर्चना की. इसके बाद वे सीधे इंदौर रवाना हो गए. इस बीच, एक पुलिस अफसर ने पुष्टि की कि सीजेआई शुक्रवार की अलसुबह करीब 4 बजे इंदौर से सड़क मार्ग द्वारा वापस उज्जैन आएंगे. वे महाकालेश्वर मंदिर में भस्मआरती में शामिल होंगे और इसके बाद इंदौर लौट जाएंगे.
सीजेआई बनने के बाद मध्यप्रदेश में पहली बार आए वेंकटा रमणा की ये विशुद्ध धार्मिक यात्रा थी. शायद इसीलिए न्यायिक कार्य से जुड़े कई लोगों सहित अन्य गणमान्य नागरिकों को भी काफी प्रयास करने के बावजूद उनसे सौजन्य मुलाकात का अवसर नहीं मिल पाया! मगर, उनका उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करने का निर्णय सभी को अचंभित कर गया! अनेकों लोगों के मन में प्रश्न कौंधने लग गए कि आखिर वे भरी ठण्ड में दो-दो बार महज 10 घंटे के अंतराल में उज्जैन की यात्रा क्यों करना चाहते हैं? पिछले दो दशक के दौरान मुख्यमंत्रियों, केन्द्रीय मंत्रियों और राज्यपालों ने भी उज्जैन में रात्रि विश्राम करने से तौबा ही की है…!!!
इस बारे में प्रख्यात विद्वान डॉ मोहन गुप्त ने कहा कि वीवीआईपी लोग उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करते, ये सब फालतू की बात है. महाकालेश्वर राजा हैं ये तो सत्य है, लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री वगैरह राजा नहीं हैं. प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू यहां सर्किट हाउस में ठहर चुके हैं. प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद सहित उनके जैसी कई शख्सियतें उज्जैन में सर्किट हाउस में रात्रि में रुकी हैं. शायद इंदौर में सुविधाएं ज्यादा हैं, इसलिए ये लोग आजकल वापस लौट जाते हैं. लेकिन उज्जैन में ठहरने में कोई आपत्ति तो नहीं है…
वयोवृद्ध इतिहासविद डॉ भगवतीलाल राजपुरोहित बताते हैं कि ये केवल एक अफवाह है जो एक बार चली तो चलती गई, अकारण! ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इस तरह का कोई प्रमाण उपलब्ध है. महाकवि कालिदास ने तो ‘रघुवंशम’ में उल्लेख किया है कि राजा का राजमहल महाकालेश्वर मंदिर के पास में स्थित था. मालूम नहीं उक्त तरह की परम्परा कहां से चालू हो गई? उज्जैन से जुड़ा ऐसा कोई शकुन या अपशकुन भी नहीं है…
प्रसिद्द ज्योतिर्विद पंडित आनंद शंकर व्यास के अनुसार ग्वालियर स्टेट के ज़माने में ये मान्यता जरूर थी कि स्टेट के राजा महाकाल जी को उज्जैन का सम्राट मानते थे. एक राज्य में दो राजा नहीं रुकते थे, तो वे खुद नगर सीमा के बाहर ठहरा करते थे. ना मालूम वीवीआपीपी लोगों को कौन फीड-बेक दे देता है जो वे किसी भय की आशंका से उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करते…???

