चंम्बल नदी, की धारा के बीचों बिच विराजमान श्री जलेश्वर बाबा जहाँ चंबल नदी त्रिशूल के आकार में बहती है साथ ही बाए ओर से देखने पर ॐ के स्वरूप में भी हम इस पावन धारा को देख सकते है । ड्रोन से लिये गए चित्र में आकर्षक व मनमोहक नजारे त्रिशूल दिखाई देता है।
श्री जलेश्वर महादेव इंदौर जिले के आखरी छोर पर गौतमपुरा से 9 किलोमीटर दूर इंगोरिया रोड़ से 300 मीटर की दूरी पर पश्चिम दिशा में ग्राम नरसिंगा में चंबल नदी के बिचोबिच स्थित है, नदी के किनारे से दिखने पर यह एक सामान्य ओटला दिखता है जबकि यहाँ एक अदभुत शिवलिंग है जिसे आसपास के ग्रामीण भक्त जलेश्वर महादेव के नाम से पुकारते है, भक्तगण यहां आकर सेवा, पुजा, अर्चना करते है । महादेव के भक्त व ग्राम नरसिंगा के निवासी मदन सिंह चावड़ा ने बताते है कि जुलाई- अगस्त माह से 8 महीने यह जलेश्वर बाबा जलमग्न रहते है हर कोई व्यक्ति इनके ओटले तक नही पहुच सकता । इस दौरान पूजा अर्चना नदी पर बनी पुलिया के ऊपर से ही की जाती है । यहाँ सच्चे भाव से की गई सेवा कभी खाली नहीं जाती यहां मांगी गई हर कामना पूरी होती है।
*श्री जलेश्वर महादेव की विशेषता ।
चंम्बल नदी के बीचों बीच स्थिति जलेश्वर महादेव को 300 फिट ऊपर ड्रोन से देखा जाए तो चंम्बल नदी त्रिशूल आकर में दिखती है वही यदि बाई ओर से देखा जाए तो ओम का आकर बनता है जिसमे जलेश्वर महादेव का शिव लिंग विराजमान है ।
इस शिव लिंग की विशेषता है कि बारिश के दौरान जब चंबल नदी अपने रोन्द्र रुप ( उफान) में होती है तब जलेश्वर महादेव अपना स्थान छोड़ कर जल मे प्रवाहित हो जाते है परन्तु जब पानी उत्तर ता है तो यह शिवलिंग उफान की धारा के विपरीत दिशा में मिलते हैं । मंदिर के पुजारी ईश्वर लाल ने बताया कि 70 वर्षो से वह यहाँ पूजा कर रहे है इसके पहले उनके दादा परदादा भी यही पूजा करते थे पर हर वर्ष यहाँ चंम्बल नदी उफ़ान पर आती है पर जलेश्वर बाबा कभी भी यहाँ से आगे नही बहे शिव रात्रि के दिन यहां सुबह से देर रात तक अनेक आयोजन होते है दूर दराज के भक्त अभिषेक के लिए आते है वही नरसिंगा गाव में शाम 4 बजे नगर भ्रमण पर सोभा यात्रा के रूप में निकलते है और रात्रि में भजन संध्या का आयोजन भी होता है
