
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन अपनी रफ्तार पकड़ता जा रहा है। अभी तक तो हाईवे को ही जाम किया जा रहा था, लेकिन अब शहर के भीतर भी जाम लगाने की रणनीति पूरी कर ली गई है। सुबह से ही शहर के मुख्य चौराहे कालाआम समेत सातों तहसील पर भाकियू पदाधिकारी जाम लगाएंगे। किसानों के भारत बंद के आह्वान को कांग्रेस, सपा, बसपा, रालोद और आप जैसे राजनीतिक दलों ने भी अपना समर्थन दे दिया है।
भारत सरकार से कई बार वार्ता होने के बाद भी किसानों की मांग का कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। जिससे किसान अब और भी अधिक आक्रोशित हो उठा है। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के विभिन्न संगठनों ने आठ दिसंबर यानी मंगलवार को भारत बंद का एलान किया है। जिसको सफल बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपना समर्थन दे दिया है। भारतीय किसान यूनियन के चीफ सेक्रेटरी एनसीआर मांगेराम त्यागी ने बताया कि बंद को सफल बनाने के लिए जिले को सात सेक्टरों में बांटा गया है। सभी सेक्टरों पर भाकियू के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। सभी जगह सुबह 11 बजे से तीन बजे तक जाम लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह स्वयं पदाधिकारी और किसानों के साथ नगर के कालाआम चौराहे पर उपस्थित रहेंगे। बताया कि यह आंदोलन शांतिपूर्वक होगा, कोई भी व्यवस्था न बिगडे़ इसके लिए सभी पदाधिकारियों को कह दिया गया है। उन्होंने पदाधिकारियों से अपील की है कि सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता संयम से काम लें और आंदोलन को शांतिपूर्वक अंजाम दिया जाए।
बाजार के बारे में बताया कि व्यापारी अगर स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखते हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन हमारे पदाधिकारी कोई जोर जबरदस्ती नहीं करेंगे। वहीं, कांग्रेेस के प्रदेश महासचिव प्रशांत वाल्मीकि और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील चरौरा ने बताया कि किसान के आंदोलन को पार्टी का पूरा समर्थन है। किसानों की मांग जायज है जो सरकार को मान लेनी चाहिए। सपा के महासचिव राहुल यादव ने बताया कि मंगलवार को किसानों के समर्थन में किसान यात्रा निकाली जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन के चीफ सेक्रेटरी एनसीआर मांगेराम त्यागी ने बताया कि बंद के दौरान किसी को परेशान नहीं किया जाएगा। बताया कि सभी पदाधिकारियों को बता दिया गया है कि महिला, स्कूल के बच्चों की गाड़ी, बरात की बस, एंबुलेेंस व जरूरी काम को जा रहे लोगों को परेशान न किया जाए और न ही उनको रोका जाए।
