देश की बात, आपके शहर से
मेमो में गिरफ्तारी के खास ‘आधार’ न बताना ड्यूटी में लापरवाही, गलती करने वाले पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
देश 2 बार पढ़ी गई

मेमो में गिरफ्तारी के खास ‘आधार’ न बताना ड्यूटी में लापरवाही, गलती करने वाले पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

गुरुवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य में कोई भी पुलिस अधिकारी जो अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के खास 'आधार' (Ground) बताने में नाकाम रहता है, उसे सस्पेंड करने के बाद उसके खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई की जाएगी।

Abhishek Raghuvanshi26 जनवरी 2026 · 1 मिनट पढ़ें
इस खबर को अपनों तक पहुंचाएं

गुरुवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य में कोई भी पुलिस अधिकारी जो अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के खास ‘आधार’ (Ground) बताने में नाकाम रहता है, उसे सस्पेंड करने के बाद उसके खिलाफ डिपार्टमेंटल कार्रवाई की जाएगी। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के सिर्फ़ फॉर्म भरकर कानून का “खोखला पालन” करना ड्यूटी में लापरवाही है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

तस्वीरों में खबर3 फोटो

“यह सही समय है कि उन पुलिस अधिकारियों के साथ सख्ती से निपटा जाए, जो अरेस्ट मेमो की ज़रूरतों का पालन नहीं कर रहे हैं और भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत दिए गए संवैधानिक आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। साथ ही CrPC की धारा 50 और 50A/BNSS की धारा 47, 48 और का भी उल्लंघन कर रहे हैं।

” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यह आदेश उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को बताया जाए।

यह फैसला उमंग रस्तोगी और एक अन्य द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका पर आया, जिन्होंने गौतम बुद्ध नगर में सिविल जज द्वारा पारित गिरफ्तारी और उसके बाद के रिमांड आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी है, क्योंकि आरोपी को अनिवार्य आधार लिखित में नहीं दिए गए, जो मिहिर राजेश बनाम महाराष्ट्र राज्य 2025 LiveLaw (SC) 1066 और प्रिया इंदोरिया बनाम कर्नाटक राज्य 2023 LiveLaw (SC) 996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

मामले की पृष्ठभूमि

28 नवंबर, 2025 को लगभग 05:40 बजे, याचिकाकर्ता के पिता को गौतम बुद्ध नगर पुलिस स्टेशन के SHO द्वारा दिल्ली में याचिकाकर्ताओं के बिजनेस परिसर से ‘गैर-कानूनी’ तरीके से अगवा कर लिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके पिता को गौतम बुद्ध नगर पुलिस स्टेशन में 5 दिनों तक गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया और उस दौरान, BNS की धारा 317(2) के तहत एक FIR दर्ज की गई और उन्हें देरी से संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। आगे यह आरोप लगाया गया कि जब याचिकाकर्ता के पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की तो पुलिस ने 26 दिसंबर, 2025 को उत्तराखंड के हल्द्वानी से याचिकाकर्ता नंबर 1 को बिना गिरफ्तारी का कोई आधार बताए गिरफ्तार कर लिया।

उसे अगले दिन गौतम बुद्ध नगर में रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, लेकिन उसे गिरफ्तारी मेमो की कोई कॉपी नहीं दी गई।

जब उसके वकील ने उसी दिन उपरोक्त आधार पर उसकी रिहाई के लिए एक आवेदन दिया तो संबंधित मजिस्ट्रेट ने याचिका खारिज कर दी। इसलिए याचिकाकर्ता ने अवैध रिमांड और अवैध गिरफ्तारी मेमो के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने पाया कि हालांकि जांच अधिकारी ने गिरफ्तारी मेमो तैयार करने के लिए सही प्रोफोर्मा का इस्तेमाल किया, लेकिन गिरफ्तारी के आधारों से संबंधित कॉलम ठीक से नहीं भरा गया।

उल्लेखनीय है कि मानकीकृत मेमो के क्लॉज 13 में पुलिस को विशिष्ट विवरण रिकॉर्ड करने की आवश्यकता होती है, जिसमें आरोपी की संलिप्तता दिखाने वाली सामग्री, एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी की आवश्यकता और दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का विवरण शामिल है।

इस मामले में इन विशिष्ट विवरणों को प्रदान करने के बजाय सब-इंस्पेक्टर ने केवल यह नोट किया कि आरोपी को अपराध और लागू धाराओं के बारे में सूचित किया गया और उसके पिता को टेलीफोन पर सूचित किया गया।

हाईकोर्ट की टिप्पणियां

बेंच ने इस चूक पर कड़ी आपत्ति जताई। पुलिस के मेमो की तुलना 25 जुलाई, 2025 को जारी DGP के सर्कुलर से करते हुए कोर्ट ने पाया कि क्लॉज़ 13 (i) से (vi) की ज़रूरतों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया गया।

कोर्ट ने कहा कि क्लॉज़ में सिर्फ़ आरोपी को धाराओं के बारे में बताने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि “वह सारा मटेरियल बताना ज़रूरी है जिससे अपराध में उसकी संलिप्तता साफ़ हो”।

कोर्ट ने इस प्रकार कहा:

“जांच अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता नंबर 1 की गिरफ्तारी के समय तक इकट्ठा किए गए मटेरियल का कोई विवरण नहीं दिया गया, जिस आधार पर उसकी गिरफ्तारी ज़रूरी थी। गिरफ्तार व्यक्ति से संबंधित अन्य इकट्ठा किए गए मटेरियल, दस्तावेज़ी या इलेक्ट्रॉनिक, का विवरण भी नहीं दिया गया।”

बेंच ने पुलिस की कार्रवाई को “कानून का सिर्फ़ दिखावटी पालन” और गैर-कानूनी काम को सही ठहराना बताया।

कोर्ट ने कहा कि नए गिरफ्तारी मेमो का मकसद, जिसे खास तौर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया, पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने नाकाम कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के मिहिर राजेश शाह फैसले पर भरोसा करते हुए, जिसमें कहा गया कि गिरफ्तारी के आधार गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित में दिए जाने चाहिए, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी और उसके बाद 27 दिसंबर, 2025 के रिमांड आदेश को गैर-कानूनी, अमान्य और रद्द घोषित कर दिया।

बेंच ने इस तरह के प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और एक व्यापक निर्देश जारी किया कि क्लॉज़ 13 के अनुसार गिरफ्तारी के आधारों का खुलासा न करना, एक पुलिस अधिकारी द्वारा “कर्तव्य में लापरवाही का कदाचार” माना जाएगा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों को सस्पेंड करने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी ताकि वे इस गैर-कानूनी काम को आगे न दोहरा सकें। इसके साथ ही कोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिवीज़न)/FTC, गौतम बुद्ध नगर द्वारा पारित रिमांड आदेश रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा किया जाए।

Case title – Umang Rastogi And Another vs. State Of U.P. And 3 Others 2026 LiveLaw (AB) 40

ePaper
आज का अंक28 Sep to 4 Oct

28 सितंबर, सोमवार

ePaper पढ़ें
Abhishek Raghuvanshi
बालाघाट जिले के 100 नक्सल प्रभावित गांवों में विकास अभियान तेजMadhyaPradeshबालाघाट जिले के 100 नक्सल प्रभावित गांवों में विकास अभियान तेज 20 घंटे पहलेश्रीमती गौर ने वार्ड 72 में 41 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजनBhopalश्रीमती गौर ने वार्ड 72 में 41 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन 20 घंटे पहलेउप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बांड डॉक्टर्स से ग्रामीण स्वास्थ्य पर संवादMadhyaPradeshउप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बांड डॉक्टर्स से ग्रामीण स्वास्थ्य पर संवाद 20 घंटे पहलेउप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के निर्देश दिएMadhyaPradeshउप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के निर्देश दिए 20 घंटे पहलेमुख्य सचिव ने आर्मी डे परेड तैयारियों की समीक्षाMadhyaPradeshमुख्य सचिव ने आर्मी डे परेड तैयारियों की समीक्षा 20 घंटे पहलेस्नोडोनिया का नया स्लेट ट्रेल: 83 मील का लूपLifestyleस्नोडोनिया का नया स्लेट ट्रेल: 83 मील का लूप 20 घंटे पहले13 लाख टन कचरा, 100 एकड़ जमीन और 65 करोड़ की बचत… इंदौर ने कर दिखायाIndore13 लाख टन कचरा, 100 एकड़ जमीन और 65 करोड़ की बचत… इंदौर ने कर दिखाया 21 घंटे पहलेअफसरों पर भड़के महापौर, बोले आपके कागजी खेल से सरकार की छवि खराब हो रहीIndoreअफसरों पर भड़के महापौर, बोले आपके कागजी खेल से सरकार की छवि खराब हो रही 21 घंटे पहले
बायर्न के वैनसेंट कॉम्पनी अस्पताल से छुट्टी, स्वास्थ्य अच्छाSportsबायर्न के वैनसेंट कॉम्पनी अस्पताल से छुट्टी, स्वास्थ्य अच्छा 1 दिन पहलेJill Kenning की दर्दनाक स्थिति: Nabilone दवा की UK में कमीHealth & FitnessJill Kenning की दर्दनाक स्थिति: Nabilone दवा की UK में कमी 1 दिन पहलेMicrosoft का Q1 राजस्व 19% बढ़ा, शेयर 5% ऊपरTechnologyMicrosoft का Q1 राजस्व 19% बढ़ा, शेयर 5% ऊपर 1 दिन पहलेरूस के राष्ट्रपति पुतिन ने एलोन मस्क को ‘सच्चा जीनियस’ कहाTechnologyरूस के राष्ट्रपति पुतिन ने एलोन मस्क को ‘सच्चा जीनियस’ कहा 1 दिन पहलेकुशवाहा ने जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करने का निर्देश दियाMadhyaPradeshकुशवाहा ने जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करने का निर्देश दिया 1 दिन पहलेमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने का लक्ष्यMadhyaPradeshमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने का लक्ष्य 1 दिन पहलेमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए नई योजनाएँ घोषित कीMadhyaPradeshमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए नई योजनाएँ घोषित की 1 दिन पहलेअनंत इंदौर और भविष्य के इंदौर की दिशा में बड़ा कदमIndoreअनंत इंदौर और भविष्य के इंदौर की दिशा में बड़ा कदम 1 दिन पहले
↑