- 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगा मध्यप्रदेश
- सीएम डॉ. मोहन ने संदेश में यूसीसी सहित हर क्षेत्र का किया जिक्र
- मृगनयनी बना देश का पहला सार्वजनिक उपक्रम
- पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को हासिल हुईं ऐतिहासिक उपलब्धियां
80वें स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को पूरा मध्यप्रदेश देशभक्ति के रंग में रंग गया। चारों ओर तिरंगा लहराया और देशभक्ति गीतों ने युवाओं को उत्साह से भर दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन हुआ और ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान जन-गण-मन की धुन बजाई गई। उसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। परेड में सशस्त्र दलों ने हर्ष फायर किया और पुलिस बैंड ने देश भक्ति गीतों की धुनों से वातावरण में राष्ट्र प्रेम और समर्पण के भाव का संचार किया। परेड में पुलिस बैंड सहित कुल 22 टुकड़ियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नाम अपने संदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC), किसान, खेत, निवेश, शिक्षा, युवा, वन, धर्म-संस्कृति सहित हर क्षेत्र का जिक्र किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर, आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मैं प्रदेश के साढ़े आठ करोड़ नागरिकों की ओर से आजादी के सभी जननायकों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चरणों में, कोटि-कोटि वन्दन करता हूं। स्वाधीनता के इस संग्राम में, रानी दुर्गावती, रानी अवंती बाई, महाराजा छत्रसाल और टंट्या मामा भील से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक मध्यप्रदेश के अनगिनत वीर सपूतों ने भी अपनी आहुतियां दी हैं। कृतज्ञ मध्यप्रदेश आज उन सभी को श्रृद्धा पूर्वक नमन करता है। उन्होंने कहा मैं मध्यप्रदेशवासियों की ओर से, पुलिस और हॉक फोर्स के उन वीर जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर, असीम शौर्य का परिचय देते हुए, वीरगति को प्राप्त हुए। ऐसे ही जांबाजों की बदौलत, नक्सल मुक्त प्रदेश बनाने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल ने, भारत वर्ष की महिमा को इन पंक्तियों में व्यक्त किया है, ‘भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्रपुरूष है, हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं। पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएं हैं। कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है। यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है। इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए।’
अविस्मरणीय है आज का महोत्सव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजादी का ये महोत्सव इसलिए भी अविस्मरणीय हो गया है क्योंकि, आज राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीय गीत वन्दे-मातरम् का भी गायन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण को केन्द्र में रखते हुए भारत को आधुनिक, विकसित, आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समृद्ध और गौरवशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन में आज भारत की गणना विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमि समानता, समरसता और समभाव की भूमि है। भगवान श्रीराम से लेकर भगवान श्री कृष्ण तक और संतों से लेकर महापुरुषों तक, सभी ने समानता का संदेश दिया है। भारतीय संविधान की इसी मूल भावना के अनुरूप ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर रहें हैं। हमने ‘’एक देश- एक विधान- एक प्रधान- एक निशान’’ के विचार को धरातल पर उतारकर, सबके लिए एक जैसा कानून लागू कर रहें हैं। समान नागरिक संहिता एक ओर भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त कर समरसता का संचार करेगी तो दूसरी ओर महिलाओं को अत्याचार और अन्याय से मुक्ति दिलाएगी ।
भारतीय संस्कृति का मूल वसुधैव कुटुम्बकम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समरसता के संत गुरू रविदास जी महाराज की 650वीं जयन्ती का उत्सव हम 18 अगस्त, 2026 से प्रदेश भर में मनाने जा रहे हैं।‘’वसुधैव कुटुम्बकम्’’ भारतीय संस्कृति का मूल है। यह हर्ष का विषय है कि, जून 2026, में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों एवं कृषि कार्य समूह तथा अगस्त, 2026 में ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों और ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की, बैठक के आयोजन का सौभाग्य मध्यप्रदेश को प्राप्त हुआ है। इन आयोजनों ने न केवल मध्यप्रदेश को दुनिया के मानचित्र पर नई चमक दी है, बल्कि वैश्विक शांति और साझी संस्कृति का एक मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि लोक का तंत्र पर भरोसा ही सुशासन की पहली सीढ़ी है। जन-कल्याण यदि साध्य है तो, जन-विश्वास और जन-संवाद उसके साधन। इसी लक्ष्य के साथ सरकार ने दिनांक 7 अगस्त-2026 से ‘’मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’’ प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि जन-विश्वास अभियान का लक्ष्य स्पष्ट है- ‘’न देरी, न दूरी’’। समाधान से उत्थान के पवित्र भाव के साथ, इस अभियान का प्रथम चरण 8 जनवरी-2027 तक संचालित किया जाएगा। हमारी सरकार ने, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 10 प्रतिशत अधिक है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय में प्रचलित भावों पर, पिछले वर्ष की तुलना में 9% की वृद्धि हुई है। त्रिवर्षीय रोलिंग बजट की अवधारणा को लागू करने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘GYAN’ यानि गरीब, युवा, नारी और किसान का जो मंत्र दिया था, उसमें इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर हमने ज्ञानी (GYANII) के रूप में, उसका विस्तार कर दिया है।
किसानों के खेत हमारे लिए देवस्थल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के खेत सरकार के लिए देवस्थल हैं और खेत से उपजा एक-एक दाना प्रसाद के समान है। वर्ष-2026, को हम किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रहें है। सभी जिलों में, बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर, किसानों की मेहनत और समर्पण को सम्मानित किया जा रहा है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार शासकीय योजनाओं के लिए, कृषि भूमि का भू-अर्जन करने पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिए जाने का किसान हितैषी निर्णय लागू किया है। हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से नई “कवच” योजना शुरू की है। ऐसी समितियां जिनकी जांच लंबित है, परन्तु उनके सदस्य किसान भाईयों का उसमें कोई दोष नहीं हैं, उनको नियमित किया जाकर योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के दौरान सरकार ने प्रदेश के हर किसान को खाद-बीज की उपलब्धता, पर्याप्त बिजली, हर खेत को सिंचाई का पानी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों का उपार्जन, चिन्हित फसलों में भावान्तर की राशि का भुगतान, खेती पर संकट आने की स्थिति में बीमा और राहत राशि का वितरण, किसान सम्मान निधि की राशि का भुगतान आदि सभी लाभ दिलाने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने विगत ढाई वर्षों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों के खातों में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की गई है।
सिंचित खेती भी रोजगार का बड़ा साधन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई बार हमारे मन में ऐसी धारणा बन जाती है कि रोजगार मुख्य रूप से केवल उद्योगों या नौकरियों से ही मिलता है। लेकिन, मैं प्रदेश के युवाओं को बताना चाहूंगा कि मध्यप्रदेश में अब सिंचित खेती भी रोजगार के एक बड़े साधन के रूप में उभर रही है। मैं खेती में रुचि रखने वाले युवाओं से आह्वान करना चाहूंगा कि, वे अधिक से अधिक उद्यानिकी फसलों को अपनायें। आज मध्यप्रदेश संतरा, केला, अंगूर, सीताफल, सब्जी और मसालों से लेकर मखाने, ब्लूबेरी, स्ट्राबेरी, ड्रैगन फ्रूट, गेंदा और गुलाब की खेती तक नई तकनीक और नई फसलें किसानों की तकदीर को बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को, देश की मिल्क-केपिटल बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश में दुग्ध संकलन आज लगभग 12 लाख लीटर प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच चुका है। हमारे दुग्ध उत्पादकों को आठ रुपए से अधिक, प्रति लीटर तक का मुनाफा हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प से प्रेरित होकर, प्रदेश में हम लखपति गौपालक दीदी योजना को प्रोत्साहित कर रहे हैं। नस्ल सुधार के साथ, बछिया पालन करके, प्रदेश की महिलाएं लखपति बनने का सपना साकार कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मत्स्य पालन नीति-2026 लागू की है, जिसके अंतर्गत एक अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय कंपनी के साथ, मध्यप्रदेश में 7 हजार 430 करोड़ रुपए के निवेश तथा बाय-बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए है।
अंतिम खेत तक सिंचाई के लिए संकल्पित सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार अंतिम छोर के अंतिम खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हृदय से आभार, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल की 100वीं जन्म जयंती के अवसर पर 44 हजार 600 करोड़ की लागत की देश की पहली, नदी जोड़ो केन-बेतवा परियोजना की सौगात दी है। मां नर्मदा के जल से, विंध्य अंचल में, हरियाली लाने का सपना स्लीमनाबाद टनल परियोजना की सफलता के रूप में साकार होने जा रहा है। वर्ष 2028-29 तक, मध्यप्रदेश की सकल सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर, 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, खेत से लेकर कारखाने तक यानी फार्म टू फैक्ट्री तक, पूरी वैल्यू चेन तैयार कर रही है। ’मृगनयनी’ देश का ऐसा, पहला सार्वजनिक उपक्रम बन गया है, जिसने प्रदेश के बुनकरों, कलाकारों और ओडीओपी उत्पादों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर प्रदेश में ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ भी किया गया है। उन्होंने कहा कि युवा, मध्यप्रदेश के सामर्थ्य का जीवन्त प्रतीक हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को, निवेश और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया था, वर्ष 2026 किसान कल्याण वर्ष है और अब इसे आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2027 को, हमने युवा वर्ष के रूप में, मनाने का निर्णय लिया है। युवाओं के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास और कल्याण के लिए, हमने इन्द्रधनुषी रणनीति का निर्माण किया है, जिसके 7 महत्वपूर्ण स्तंभ हैं- गुणवत्तायुक्त शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता एवं स्वरोजगार, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर, स्टार्टअप्स को सहयोग, खेल-कला-संस्कृति-शोध एवं अनुसंधान प्रोत्साहन और नेतृत्व क्षमता विकास।
सरकार का लक्ष्य युवाओं को सशक्त बनाना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमने 85 हजार से अधिक युवाओं की शासकीय सेवाओं में नियुक्तियां की हैं तथा आने वाले समय में प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएंगे। इसी प्रकार हमारी सरकार अगले 1 वर्ष में 1 लाख से अधिक युवाओं को आईटीआई में तथा प्रतिवर्ष 10 हजार युवाओं को ग्लोबल स्किल पार्क में कौशल प्रशिक्षण दिलाने का काम करेगी। हम कौशल विकास के अंतर्गत मध्यप्रदेश में एक अलग प्लेसमेंट सेल बनाऐंगे, जो उद्योग और सरकार के बीच, एक कड़ी का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उद्यम पोर्टल पर विगत ढाई वर्षों में, 3 लाख 34 हजार से अधिक विनिर्माण ईकाईयां पंजीकृत हुई, जिनमें 33 लाख 80 हजार युवाओं को, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। वृहद औद्योगिक ईकाईयों में भी, 50 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है। राज्य सरकार अगले ढाई वर्ष में, उन युवाओं पर विशेष रूप से फोकस करने जा रही है, जो किसी कारण से 10वीं की परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाए अथवा जिन्होंने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी है। हम ऐसे युवाओं के हाथ में हुनर देकर, उन्हें इतना सशक्त बनाएंगे कि वे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश और विदेश जाकर भी रोजगार प्राप्त कर सकें।
युवाओं के विकास के लिए बहुत कुछ कर रही सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवाओं को केन्द्र में रखकर, एमएसएमई और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए प्रदेश में ‘मध्यप्रदेश एमएसएमई विकास नीति 2025’, ‘स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन योजना 2025’ नीति लागू की गई। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 8 हज़ार स्टार्टअप संचालित हैं, इसमें से 50 प्रतिशत स्टार्टअप का नेतृत्व, नारी शक्ति, कर रही है। हमारा संकल्प है कि, प्रदेश के हर जिले में, कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर हो। हमने आगामी ढाई वर्षों में स्टार्ट-अप की संख्या 12 हजार से अधिक और 100 नवीन इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर, को-वर्किंग स्पेस तैयार किए जाएंगे। युवा पीढ़ी की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, एआई, स्पेसटेक और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में, एमएसएमई की भागीदारी को अनिवार्य रूप से बढ़ाया जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित न्यायालीन मामलों की, त्वरित सुनवाई और निराकरण के लिए, राज्य सरकार द्वारा 4 ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स के इस युग में, प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से, मध्यप्रदेश ‘’ऑरेन्ज इकॉनामी’’ के विकास की ओर भी, तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसके अंतर्गत मल्टीमीडिया, गेमिंग, कला, मीडिया, मनोरंजन जगत, संस्कृति, अध्यात्म एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल है। राज्य सरकार ने, समाज को, दिशा देने वाले डिजीटल कंटेंट क्रिएटर्स को, विभिन्न केटेगरी में सम्मानित करने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों के कारण, प्रदेश में लगभग हर क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में, विभिन्न क्षेत्रों में कुल 34 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नई तकनीक आधारित उद्योगों में भी, मध्यप्रदेश तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश के टेक सेक्टर में 12 हजार करोड़ से अधिक का निवेश, धरातल पर उतर चुका है। ग्वालियर में उभरता टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, जबलपुर और शिवपुरी में आगे बढ़ता डिफेंस कॉरीडोर, औद्योगिक विकास की कहानी खुद बयान कर रहा है। धार का पीएम मित्र पार्क, 21 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ, वस्त्र क्रांति की नई कहानी लिख रहा है।
हर जिले में होगी एमएसएमई पार्क की स्थापना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का विजन है कि, हम प्रत्येक जिले में एक एमएसएमई पार्क की स्थापना करेंगे। इसके साथ ही, प्रदेश के 10 एमएसएमई क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। भोपाल में इंजीनियरिंग सेक्टर हेतु 30 करोड़ रुपए की लागत से, नए केन्द्र की स्थापना की जा रही है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि, औद्योगिक क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई, विभिन्न नीतियों को भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा, सर्वाधिक निवेश मित्र नीतियों के रूप में सराहा गया है। मध्यप्रदेश की धरती पर ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट- 2027, पुन: भोपाल में आयोजित होने जा रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि, यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, निवेश एवं रोजगार की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगी। वैसे तो मध्यप्रदेश की सीमा किसी समुद्र को नहीं छूती, लेकिन हमारा संकल्प सात समंदर पार तक जाता है। हमारे उत्पाद, विश्व के बाज़ार तक पहुंचे, इस लक्ष्य के साथ हमारा संकल्प है कि, हम प्रदेश के हर जिले को निर्यात का हब बनाएंगे। इसके लिए सभी 55 जिलों की निर्यात कार्य योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्र दिया है-वोकल फॉर लोकल, लोकल गोज़ ग्लोबल। मध्यप्रदेश इसमें अपनी पंक्ति भी जोड़ रहा है-गर्व से कहो, यह मध्यप्रदेश में बना है। भारत जब, एक ट्रिलियन डॉलर के वस्तु निर्यात का इतिहास रचेगा, तो उसमें हृदयप्रदेश की धड़कन, सबसे तेज़ सुनाई देगी। उन्होंने कहा कि गांवों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में, विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश निरंतर अग्रणी रहा है। आवास योजनाओं में पूर्ण आवासों की संख्या के मान से, मध्यप्रदेश, देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि विगत ढाई वर्ष में, जल गंगा संवर्धन अभियान, मध्यप्रदेश में एक नई जल क्रांति लेकर आया है। जल संरक्षण और संवर्धन के इस मध्यप्रदेश मॉडल की, देशभर में सराहना हुई है। जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रणी है।
बेटी से ही आती है घर में खुशहाली
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत, पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक, महिला सशक्तीकरण के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर गया है। मध्यप्रदेश में दिनांक 27 अप्रैल 2026 को विधानसभा के 1 दिवसीय विशेष सत्र में देश की संसद तथा सभी विधानसभाओं में, महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण एवं परिसीमन लागू करने संबंधी ‘’नारी शक्ति वंदन’’ संकल्प पारित किया गया है। “जिस घर में बेटी मुस्काती है, उस घर में खुशहाली आती है; जिस प्रदेश की नारी आगे बढ़ती है, वही धरती नई कहानी गढ़ती है।” ‘’मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना‘’ लगभग 1 करोड़ 25 लाख बहनों की जिंदगी को सशक्त बनाने का माध्यम बन गई है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से प्रदेश की 53 लाख 55 हजार से अधिक बेटियां जुड़ी हैं। सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय, अब प्रदेश की पहचान बन गए हैं और इस मॉडल का अनुसरण अन्य प्रदेश भी कर रहे हैं। सांदीपनि विद्यालयों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने, राज्य स्तरीय मेरिट सूची में अपना स्थान बनाया है। वर्ष 2026 के हाई स्कूल परीक्षा परिणाम में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में से 7 जनजातीय बाहुल्य जिले शामिल हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में,प्रदेश में कुल 73 विश्वविद्यालय, 1 हजार 400 से अधिक महाविद्यालय प्रदेश, के 16 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य को गढ़ रहे हैं। वर्ष 2026-27 में हमारे कॉलेजों में, रिकार्ड ई-प्रवेश हुए हैं। जब मै यह देखता हूं कि महाविद्यालयों में प्रत्येक 100 बेटों की तुलना में 171 बेटियां दाखिला ले रही हैं, तो मेरा मन प्रसन्नता से भर उठता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए, सरकार ने पिछले तीन माह में 1 हजार नए डॉक्टरों की नियुक्ति की है। अगले 6 माह में हम 1 हजार और डॉक्टरों की नियुक्ति करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस 1 नवम्बर, 2026 से हम मरीजों की जांच को पेपरलेस बनाने जा रहे हैं। इससे रोगी की सभी जानकारियां डिजिटल रूप में संधारित रहेगी। मरीज की जांच के बाद, उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श भी, ऑनलाईन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॅाक्टरों की कमी की पूर्ति भी हो सकेगी और मरीज को भी डॉक्टर का परामर्श लेने के लिए कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं होगी ।
मेडिकल एजुकेशन पर फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूरे प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सेवाओं के लिए निरंतर नए-मेडिकल कॉलेज खुल रहें हैं। इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो सके इसके लिए एक और चिकित्सा विश्वविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है। इस तरह से प्रदेश में अब 2 चिकित्सा विश्वविद्यालय हो जाएंगे। इसी तरह से हमने प्रदेश में 8 नये आयुर्वेदिक महाविद्यालय का निर्माण प्रारंभ कर दिया है तथा 9वें का कार्य भी शीघ्र प्रारंभ करेंगे। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण से लोक कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, विगत ढाई वर्ष में प्रदेश में लगभग 23 हजार करोड़ रुपए की लागत से, 15 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण, उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है। इंदौर-उज्जैन कॉरीडोर, इन्दौर-पीथमपुर इकॉनामिक कॉरीडोर एवं उज्जैन-जावरा हाईवे का भूमिपूजन हो गया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर एवं उज्जैन में रिंग रोड परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिन्हें वर्ष 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भोपाल एवं इंदौर के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनियोजित विकास के लिए यहाँ मेट्रोपॉलीटिन रीजन के निर्माण का निर्णय लिया गया है। यहां कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स के अलावा, पर्यावरण अनुकूल आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। भविष्य में जबलपुर एवं ग्वालियर को भी, इसी तर्ज पर मेट्रोपॉलिटन रीजन के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नगरीय निकाय में, गीता भवन के रूप में, विचार विमर्श, अध्ययन और संवाद के नए केन्द्र विकसित किए जा रहे हैं। विश्व के सबसे बड़े, धार्मिक समागम बनने जा रहे सिंहस्थ-2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए, तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही है। संतो और श्रद्धालुओं की आस्था केन्द्र में रखते हुए मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के निर्मल जल में स्नान और अन्य सभी सुविधाओं के विकास कार्य कराए जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2028 उज्जैन सिंहस्थ का आध्यात्मिक वैभव पूरी दुनिया को चकित कर देगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब ‘’बिजली गुल’’ के पुराने दौर से बाहर निकलकर ‘’बिजली फुल’’ के युग में पहुंच गया है। बीते रबी मौसम में लगभग 20 हजार मेगावाट और इस बार 21 हजार मेगावाट से अधिक मांग की आपूर्ति हमने की है, जो ऐतिहासिक है।
नवकरणीय ऊर्जा का नया पावर सेन्टर एमपी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा का नया पावर सेन्टर बन रहा है। प्रदेश की विद्युत क्षमता में 30% हिस्सा ग्रीन एनर्जी का है, जिसे हम आने वाले वर्षों में 50% तक ले जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के सूर्य से ऊर्जा बनाने की अपील से प्रेरणा लेकर, हमने न केवल सूर्य से, बल्कि हमने पानी से भी तथा पानी पर भी बिजली बनाई। प्रदेश में सोलर-सह-एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। नर्मदापुरम में देश का पहला नवकरणीय ऊर्जा उपकरण का विनिर्माण क्षेत्र, मक्सी में सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और मुरैना में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख शहरों में 550 से अधिक ई-बसों के संचालन का भी निर्णय लिया गया है। हमने इन्दौर और भोपाल में मेट्रो रेल की सौगात दी है, जो तेजी से विकसित होते इन शहरों के लिये आवश्यक है। बरसों बाद मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन की तस्वीर बदलने के लिये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना शीघ्र उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक एवं अध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि, अब आगरा में ताजमहल देखने के लिए 01 वर्ष में जितने पर्यटक आते हैं, उतने श्रद्धालु उज्जैन में 1 माह में ही आ जाते हैं। पिछले वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड 14 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने पधारकर हमारी अतिथि देवो भवः की परंपरा का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को आकाश-सी ऊंचाई देने के लिए, हमने ‘पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा’ और ‘पीएम श्री पर्यटन हेली सेवा’ की शुरुआत की है। प्रदेश में बीते 2 वर्ष में, 10 नए मार्गों पर हवाई सेवाएं प्रारंभ हुई हैं। उड़ान योजना के अंतर्गत, मध्यप्रदेश को पहले चरण में 05 नए एयरपोर्ट्स की सौगात मिल रही है। इंदौर से अबूधाबी के लिए, सीधी अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा प्रारंभ हो गई है। भोपाल से शारजाह की, अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा शीघ्र प्रारंभ किए जाने का लक्ष्य है।
राज्य में हो रहा 17 धार्मिक-सांस्कृतिक लोकों का निर्माण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजाभोज द्वारा स्थापित भोजशाला, सदियों तक ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संस्कृत भाषा का सबसे प्रखर केन्द्र रही है। भोजशाला में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक बनाएगी तथा यहां राजा भोज संस्थान की स्थापना की जाएगी। मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक एवं अध्यात्मिक अभ्युदय के लक्ष्य के साथ, 17 धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोकों का निर्माण किया जा रहा है। एकात्म धाम परिसर में 2400 करोड़ रूपये के विकास कार्य प्रगति पर हैं। श्रीराम वन गमन पथ एवं श्री कृष्ण पाथेय का निर्माण, राज्य की अध्यात्मिक समृद्धि को, वैश्विक मंच पर नई पहचान देगा और भावी पीढि़यों को अपनी विरासत से जोड़ेगा। हमने अपने स्वर्णिम इतिहास से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिये, सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक, सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य का मंचन दिल्ली के लालकिला से बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी तक किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, ‘’तन-मन-धन, सबसे ऊपर वन’’ की उक्ति को चरितार्थ कर रही है। उज्जैन, सतना, छतरपुर और भोपाल में सांस्कृतिक वन स्थापित किए जा रहें हैं। कूनो राष्ट्रीय उद्यान एवं गांधी सागर को मिलाकर, प्रदेश में 52 चीतों की आवाज गूंज रही है। काजीरंगा टाईगर रिजर्व से, 8 जंगली भैंसो को कान्हा टाईगर रिजर्व में प्रतिस्थापित किया गया है। कुल 40 कछुओं और 63 घड़ियालों को, उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। हलाली डैम क्षेत्र में भी दुर्लभ प्रजाति के 5 गिद्धों ने खुले आकाश में उड़ान भरी है। उन्होंने कहा कि सुशासन, सरकार का हृदयस्थल है। भोपाल में पहले ‘साइबर पंजीयन कार्यालय’ का शुभारंभ किया गया है। मध्यप्रदेश फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत 1 करोड़ से अधिक आईडी जनरेट कर शत-प्रतिशत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला देश का एकमात्र राज्य है। सरकार ने स्वामित्व योजना में प्राप्त, भू-अधिकार अभिलेख के पंजीकरण की पूरी फीस ग्रामीण भाई-बहनों की बजाय, स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है।
कर्मयोगी हैं हमारी शासकीय कर्मचारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विगत ढाई वर्ष में पुलिस में, बडे़ पैमाने पर भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया को गति मिलने के फलस्वरूप, पुलिस और पुलिसिंग दोनों की दक्षता और मनोबल में वृद्धि हुई है। साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक अत्याधुनिक ‘साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर’ की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पुलिस विभाग में ढाई वर्षों में अब तक 14 हजार 704 से अधिक अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है और 9 हजार 751 अतिरिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश एवं प्रदेश का नाम रोशन कर रहे है। ग्लासगो में सम्पन्न, कॉमनवेल्थ गेम्स में मध्यप्रदेश के दो खिलाड़ियों ने रजत पदक जीतकर प्रदेश की शान बढ़ाई है। प्रदेश की क्रिकेट खिलाड़ी, क्रांति गौड़, इग्लैंड के लॉर्डस मैदान में ऑनर्स बोर्ड पर, नाम दर्ज कराने वाली, दुनिया की पहली महिला क्रिकेट खिलाड़ी बन गई हैं। मुख्यमंत्री युवा शक्ति योजनान्तर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक स्टेडियम के निर्माण करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि शासकीय कर्मचारी सच्चे अर्थों में एक कर्मयोगी हैं। ये पिछले 10 वर्षो से पदोन्नति की राह देख रहे थे। राज्य सरकार ने इस विषय पर संवेदनशीलता से प्रयास करते हुए पदोन्नतियों का मार्ग प्रशस्त किया तथा अब तक, प्रदेश भर में 67 हजार से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गरीबों और वंचितों की सरकार है। समाज के सभी वर्गों के कल्याण के साथ ही तेज गति से विकास करते हुए हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। यदि कल पराकाष्ठा तक पहुंचना है तो, आज परिश्रम करना होगा, यदि कल सफल होना है, तो आज संघर्ष करना होगा, यदि कल कंगूरे का कलश बनना है तो आज नींव का पत्थर बनना होगा। आइए, आने वाले 20 वर्षों में विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए, प्रदेश के लोक और सरकार के तंत्र, दोनों कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर चलें । भीतर एक चिंगारी है, आगे बढ़ना जारी है। संकल्प हमारा पक्का है और, सिद्धि की तैयारी है, रात अंधेरी छट गई देखो, आजादी उजियारी है। लहर-लहर लहराए तिरंगा, देखे दुनिया सारी है। जन-जन का विश्वास है ताकत, जनता प्राणों से प्यारी है। आने वाला वक्त हमारा, अब मध्यप्रदेश की बारी है। भीतर एक चिंगारी है, आगे बढ़ना जारी है। संकल्प हमारा पक्का है और सिद्धि की तैयारी है।
