15 साल से पुरानी बसों को चलाने की अनुमति नहीं, हाईकोर्ट ने दिया बस मालिकों को बड़ा झटका

By Abhishek Raghuvanshi
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न्यायालय ने अपने फैसले में पहले के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि वाहन के पंजीकरण की लाइफ तय करना और स्टेज कैरिज परमिट के लिए वाहन की अधिकतम आयु तय करना दो अलग-अलग विषय हैं।
हाईकोर्ट की बस मालिकों की याचिका खारिज।
कोर्ट ने कहा यात्रियों की सुरक्षा ही सर्वोपरि है।
राज्य सरकार को नियम बनाने का अधिकार है।
इंदौर। हाईकोर्ट ने बस मालिकों को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को स्टेज कैरिज परमिट नहीं देने के नियम को वैध ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि है और राज्य सरकार को ऐसे नियम बनाने का पूरा अधिकार है। इसी के साथ बस मालिकों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।
अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने बताया, यह याचिका बस मालिकों के संगठन के अध्यक्ष वैभवसिंह तोमर की ओर से दायर की गई थी। इसमें मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम में बदलाव करते हुए वाहनों की उम्र 15 साल तय किए जाने को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए रद्द करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी भी वाहन की लाइफ तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। इसलिए राज्य सरकार द्वारा 15 वर्ष की आयु सीमा तय करना कानून के खिलाफ है। उनका कहना था कि राज्य सरकार को इस प्रकार वाहन की उम्र तय करने का अधिकार नहीं है।
वहीं कोर्ट में सरकार की ओर से इस दलील का जोरदार विरोध किया गया। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह नियम पहली बार 24 नवंबर 2010 की अधिसूचना के जरिए लागू किया गया था, जिसमें स्टेज कैरिज वाहनों की आयु सीमा 20 वर्ष तय थी।
बाद में 28 दिसंबर 2015 को संशोधन कर इसे घटाकर 15 वर्ष कर दिया गया। याचिका में इस अधिसूचना को चुनौती देने में बस मालिकों ने करीब 10 साल की देरी की है, जो अपने आप में याचिका को कमजोर बनाता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या बस मालिकों को दिए गए परमिट में वाहन की आयु से जुड़ी शर्त पहले से मौजूद थी।
इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने स्वीकार किया कि परमिट में ऐसी शर्त शामिल थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल वैध पंजीकरण होने से कोई वाहन स्टेज कैरिज के रूप में नहीं चल सकता, जब तक कि परमिट की शर्तों का पालन न हो।
न्यायालय ने अपने फैसले में पहले के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि वाहन के पंजीकरण की लाइफ तय करना और स्टेज कैरिज परमिट के लिए वाहन की अधिकतम आयु तय करना दो अलग-अलग विषय हैं। मोटर वाहन अधिनियम, राज्य सरकार को परिवहन वाहनों के संचालन और परमिट की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार देती हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि इसी मुद्दे पर पहले ही एक फैसले में हाईकोर्ट राज्य सरकार के अधिकार को सही ठहरा चुकी है। ऐसे में यह नियम पूरी तरह वैध है और इसमें किसी प्रकार की कानूनी खामी नहीं है। हाईकोर्ट ने नियमों में बदलाव को सही बताते हुए बस मालिकों की याचिका को खारिज कर दिया।

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