स्वच्छता में नवाचार और जनभागीदारी से इंदौर बना आदर्श मॉडल
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशाला आयोजित
संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर स्वच्छ भारत मिशन को लेकर इंदौर संभाग में लगातार नवाचार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में स्वच्छता संबंधी जनजागरूकता के कार्यक्रम किये जा रहे हैं। नागरिकों में साफ-सफाई के प्रति चेतना जागी है। अब संभाग में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर भी तेजी से काम हो रहा है। संभागायुक्त डॉ. खाड़े आज एक निजी होटल में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशन में परिपालन इंदौर संभाग के नगरीय निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, बुरहानपुर महापौर श्रीमती मालती पटेल, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री सूर्यकुमार सिन्हा, राजस्थान के ब्राण्ड एम्बेसेडर के.के. गुप्ता, देपालपुर नगर परिषद के अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री महेश गिरी एवं इंदौर संभाग के सभी नगर परिषद, नगर पालिका के जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
कार्यशाला में संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि किसी भी शहर की सफाई व्यवस्था में स्वच्छता कर्मियों का परिश्रम और नागरिकों की सहभागिता जरूरी है। साथ ही अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण कार्य और समयबद्ध नियोजन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संभाग के सभी कलेक्टर्स को चाहिये कि वे अपने क्षेत्र में सफाई अभियान लगातार जारी रखें। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में वर्णित प्रावधानों का भी पालन करायें। उन्होंने महापौर श्री भार्गव से आग्रह किया कि वे इंदौर को सफाई व्यवस्था का एक ऐसा आदर्श मॉडल सेंटर बनायें, ताकि प्रदेश में कहीं भी सफाई संबंधी समस्या हो तो समाधान मिल सके। इंदौर वैसे भी देश भर में स्वच्छता के लिहाज से नंबर वन है। इंदौर के नागरिक सफाई के प्रति बेहद जागरूक है। इससे सीख अब आसपास के जिले भी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम द्वारा देपालपुर को गोद लिये जाने के बाद अब वहां भी सफाई दिखने लगी है। देपालपुर नगर परिषद को भी चाहिये कि वह अपने आसपास के गाँवों को भी सफाई अभियान से जोड़ें ताकि सभी जगह स्वच्छता दिखे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में और भी नवाचार किये जाने की संभावनाएं हैं। सभी अधिकारियों को इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से लगातार काम करना होगा। सफाई के साथ-साथ राजस्व एकत्रीकरण का भी ध्यान रखें।
कार्यशाला में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सफाई के मामले में इंदौर अब गुरु ही नहीं महागुरु बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि इंदौर में सफाई के बाद अब देपालपुर में भी प्लास्टिक थैलियां दिखायी नहीं देती हैं। अधिकांश दुकानों पर डिस्पोजल गिलास बंद हो गये हैं।
कार्यशाला में राजस्थान के ब्राण्ड एम्बेसेडर श्री के.के. गुप्ता ने भी अपने अनुभव साझा किये। देपालपुर अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री महेश गिरी ने कहा कि इंदौर नगर निगम से प्रेरणा लेकर नगर परिषद देपालपुर में स्वच्छता जागरूकता आयी है। डोर टू डोर कचरा उठाया जा रहा है। जहां पर कचरे का बड़ा ढेर था, अब वहां पर एक गार्डन बना दिया गया है। कार्यशाला में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। साथ ही पुराने कपड़ों से तैयार किये गये थैलों को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यशाला में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये गये।
