स्कूल में बच्चों के बीमार होने की घटना के बाद जिला प्रशासन सख्त

By Abhishek Raghuvanshi
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शिशुकुंज एजुकेशनल सोसायटी को सुधार सूचना पत्र जारी, कमियां दूर करने के निर्देश

पुनः निरीक्षण के बाद ही खाद्य गतिविधियां प्रारंभ करने की अनुमति

हाल ही में एक निजी विद्यालय में भोजन ग्रहण करने के उपरांत बच्चों के अस्वस्थ होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश एवं कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के मार्गदर्शन में जिले के स्कूलों एवं शैक्षणिक संस्थानों में संचालित मेस एवं कैंटीनों की सघन जांच लगातार की जा रही है।
इसी क्रम में विगत 22 जून 2026 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा शिशुकुंज एजुकेशनल सोसायटी बायपास रोड झलारिया इंदौर का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों से संबंधित कई गंभीर कमियां पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के अंतर्गत संस्थान को सुधार सूचना पत्र जारी किया गया है।
निरीक्षण में पाया गया कि खाद्य निर्माण क्षेत्र की खिड़कियां उचित रूप से कवर नहीं थीं, जिससे कीट एवं अन्य पेस्ट के प्रवेश की संभावना बनी हुई थी। रॉ-मैटेरियल का भंडारण अव्यवस्थित था तथा एक्सपायरी खाद्य पदार्थ भी संग्रहित पाए गए, जिससे FIFO एवं FEFO प्रणाली का पालन नहीं होना स्पष्ट हुआ। खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी तथा खाद्य निर्माण में प्रयुक्त कुछ बर्तन फूड ग्रेड सामग्री के स्थान पर एल्यूमिनियम के पाए गए। इसके अतिरिक्त उपयोग किया हुआ कुकिंग ऑयल किचन में ही संग्रहित पाया गया। डीप फ्रीजर में तापमान नियंत्रण प्रणाली एवं तापमान प्रदर्शित करने वाला डिस्प्ले उपलब्ध नहीं था। फूड हैंडलर्स केवल कैप का उपयोग करते पाए गए, जबकि एप्रन एवं ग्लव्स का उपयोग नहीं किया जा रहा था। निर्माण में प्रयुक्त पानी की नवीनतम NABL लैब (IS:10500) जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी तथा पेस्ट कंट्रोल का रिकॉर्ड भी अपूर्ण पाया गया।
निरीक्षण के दौरान लिए गए कुल 23 खाद्य नमूनों में से ड्रिंकिंग वाटर, सोयाबीन तेल, ब्रीओ नमकीन, तुअर दाल एवं अमूल स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम के नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इन मामलों में संबंधित वैधानिक कार्रवाई भी प्रचलन में है।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा संस्थान को निर्देशित किया गया है कि 14 दिवस के भीतर निरीक्षण के दौरान पाई गई सभी कमियों का निराकरण कर आवश्यक दस्तावेजों सहित अनुपालन प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत करें। निर्धारित अवधि में संतोषजनक अनुपालन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार लाइसेंस/पंजीयन के निलंबन सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने कहा है कि विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। किसी भी प्रकार की लापरवाही एवं खाद्य सुरक्षा मानकों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यदि संबंधित प्रतिष्ठान 14 दिवस के भीतर अथवा उससे पूर्व सभी कमियों का निराकरण कर देता है, तो जिला प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त दल पुनः संस्थान का निरीक्षण करेगा। निरीक्षण में सभी कमियां दूर होना, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन पाया जाने के बाद ही संबंधित संस्थान को खाद्य कारोबार एवं मेस संचालन की अनुमति प्रदान की जाएगी। अन्यथा नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही भविष्य में नियत समयावधि पर परिसर का खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा नियमित निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा।

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