“इंदौर में ₹2 के अनुदान के बदले ₹8 के आय की क्षमता” — सांसद लालवानी
इंदौर को अधिक वित्तीय हिस्सा देने से सरकार को मिलेगा अधिक कर राजस्व; बेंगलुरु की तर्ज पर 1% विशेष अनुदान की मांग, नगर निगम के वर्तमान वित्तीय हिस्से में 5 गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव
इंदौर को वैश्विक स्तर के महानगर के रूप में विकसित करने और मध्यप्रदेश की आर्थिक एवं राजस्व क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से सांसद शंकर लालवानी ने छठवें राज्य वित्त आयोग, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया जी के समक्ष रेजिडेंसी कोठी, इंदौर में विशेष वित्तीय प्रावधानों की विस्तृत मांग रखी।
सांसद लालवानी ने तर्क दिया कि इंदौर जैसे उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्र में ₹2 का अतिरिक्त सार्वजनिक निवेश ₹8 तक की अतिरिक्त आय की क्षमता पैदा कर सकता है।
इसलिए इंदौर को वित्तीय संसाधनों में अधिक हिस्सा देना केवल अतिरिक्त अनुदान देना नहीं है, बल्कि भविष्य के आर्थिक विस्तार और सरकार के कर राजस्व को बढ़ाने वाला निवेश है।
मूल मांग पत्र में भी उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्रों में लक्षित सार्वजनिक निवेश के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों, निवेश और भविष्य के कर संग्रह को बढ़ाने का तर्क रखा गया है।
इंदौर का आर्थिक योगदान
सांसद लालवानी ने इंदौर महानगरीय क्षेत्र की आर्थिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह प्रदेश के प्रमुख आर्थिक इंजनों में से एक है।
आर्थिक क्षेत्र| इंदौर महानगरीय क्षेत्र की हिस्सेदारी
प्रदेश के कर संग्रह में| 15%
विनिर्माण क्षेत्र में| 30%
प्रदेश के निर्यात में| 60% से अधिक
इंदौर महानगरीय क्षेत्र के इस बड़े आर्थिक योगदान के अनुरूप इसकी अधोसंरचना पर भी निरंतर और पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।
तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, आवासीय विस्तार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के कारण महानगर पर नागरिक एवं आर्थिक अधोसंरचना का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
इसीलिए मांग पत्र में इंदौर महानगरीय क्षेत्र को उच्च आर्थिक क्षमता वाला क्षेत्र मानते हुए उसके आर्थिक योगदान के अनुरूप विशेष वित्तीय व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
₹2 के अनुदान के बदले ₹8 की आय की क्षमता
सांसद लालवानी ने कहा कि उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्रों में सरकारी निवेश को केवल खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यदि इंदौर की सड़क, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, स्वच्छता, डिजिटल अधोसंरचना और अन्य नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो इससे—
बेहतर अधोसंरचना → अधिक निवेश → अधिक आर्थिक गतिविधियां → रोजगार में वृद्धि → उत्पादन में वृद्धि → निर्यात में वृद्धि → अधिक कर संग्रह
का चक्र मजबूत हो सकता है।
सांसद लालवानी का तर्क है कि “इंदौर को अधिक हिस्सा देने से सरकार को कम नहीं, बल्कि भविष्य में अधिक कर प्राप्त होगा।”
यह ₹2 के सार्वजनिक निवेश के बदले ₹8 की संभावित आय क्षमता का निवेश-प्रतिफल मॉडल नीतिगत एवं उदाहरणात्मक आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्र में किया गया सार्वजनिक निवेश भविष्य में सरकार की आय का आधार बढ़ा सकता है।
बेंगलुरु की तर्ज पर इंदौर के लिए 1% विशेष अनुदान की मांग
इंदौर को देश के प्रमुख वैश्विक आर्थिक केंद्रों की प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने के लिए सांसद लालवानी ने बेंगलुरु की तर्ज पर इंदौर के लिए 1% विशेष अनुदान दिए जाने की मांग रखी है।
इस अतिरिक्त संसाधन का उपयोग विशेष रूप से महानगर की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, जिसमें—
- आधुनिक शहरी अधोसंरचना
- सार्वजनिक परिवहन
- सड़क एवं ट्रैफिक नेटवर्क
- 24×7 जलापूर्ति
- सीवरेज एवं ड्रेनेज
- स्वच्छता व्यवस्था
- शहरी हरित अधोसंरचना
- डिजिटल एवं आधुनिक नागरिक सेवाएं
प्रमुख रूप से शामिल हैं।
मांग पत्र में इंदौर नगर निगम को सामान्य वित्तीय व्यवस्था के अतिरिक्त विशेष अनुदान की पृथक व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इंदौर नगर निगम के वर्तमान वित्तीय हिस्से में 5 गुना बढ़ोतरी की मांग
सांसद लालवानी ने इंदौर नगर निगम की बढ़ती आर्थिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियों को देखते हुए वर्तमान वित्तीय हिस्से में 5 गुना बढ़ोतरी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
तेजी से विस्तार कर रहे महानगर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त और स्थायी वित्तीय क्षमता होना आवश्यक है।
इस बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता का उपयोग—
- आधुनिक सड़क एवं ट्रैफिक अधोसंरचना,
- सार्वजनिक परिवहन,
- 24×7 जलापूर्ति,
- सीवरेज एवं ड्रेनेज,
- स्वच्छता,
- शहरी हरित अधोसंरचना,
- आधुनिक नागरिक सेवाओं
के विस्तार एवं उन्नयन में किया जा सकेगा।
उद्देश्य यह है कि नगर निगम की वित्तीय क्षमता महानगर की आर्थिक वृद्धि और बढ़ती नागरिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
इंदौर महानगरीय क्षेत्र के लिए पृथक विशेष अनुदान
सांसद लालवानी ने केवल इंदौर नगर निगम तक सीमित वित्तीय व्यवस्था के बजाय पूरे इंदौर महानगरीय क्षेत्र के लिए पृथक विशेष अनुदान की मांग भी रखी है।
महानगरीय क्षेत्र का आर्थिक प्रभाव इंदौर शहर की सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह उज्जैन, देवास, धार तथा आसपास के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक आर्थिक गतिविधियों, उद्योग, रोजगार, आवास और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से जुड़ा हुआ है।
इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर—
- परिवहन नेटवर्क,
- औद्योगिक कनेक्टिविटी,
- लॉजिस्टिक्स,
- आर्थिक कॉरिडोर,
- साझा अधोसंरचना,
- जल एवं पर्यावरण प्रबंधन
का एकीकृत विकास आवश्यक है।
मांग पत्र में महानगरीय क्षेत्र/महानगरीय प्राधिकरण के लिए पृथक विशेष अनुदान की श्रेणी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि पूरे आर्थिक क्षेत्र का विकास एक समन्वित योजना के तहत किया जा सके।
महानगरीय क्षेत्र में शामिल ग्रामीण निकायों के लिए भी 1% विशेष प्रावधान
सांसद लालवानी ने महानगरीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण निकायों को भी इस विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है।
महानगरीय क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र भविष्य के औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, आवासीय और आर्थिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक अधोसंरचना विकसित नहीं की गई तो भविष्य में अनियोजित विस्तार और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए इन क्षेत्रों में—
- सड़क एवं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी,
- जलापूर्ति,
- स्वच्छता,
- ड्रेनेज,
- मूलभूत नागरिक अधोसंरचना,
- औद्योगिक एवं आर्थिक विस्तार के लिए आवश्यक सुविधाएं
विकसित करना आवश्यक है।
इसीलिए सांसद लालवानी ने सामान्य ग्रामीण निकाय अनुदान के अतिरिक्त 1% विशेष अनुदान की मांग की है, ताकि महानगरीय क्षेत्र में शामिल ग्रामीण क्षेत्र भी भविष्य की आर्थिक वृद्धि में सक्रिय भागीदार बन सकें।
इंदौर में निवेश का लाभ पूरे मध्यप्रदेश को मिलेगा
सांसद लालवानी ने कहा कि इंदौर को अधिक वित्तीय संसाधन देना किसी अन्य क्षेत्र के विकास की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
इसके बजाय उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्र में लक्षित निवेश के माध्यम से प्रदेश के कुल आर्थिक एवं राजस्व आधार को बढ़ाना इसका उद्देश्य होना चाहिए।
इंदौर में बेहतर अधोसंरचना से नए उद्योग और निवेश आकर्षित होंगे। इससे रोजगार बढ़ेगा, उत्पादन बढ़ेगा, निर्यात बढ़ेगा और अंततः सरकार का कर संग्रह बढ़ेगा।
निवेश का संभावित प्रभाव
अधिक सार्वजनिक निवेश
↓
बेहतर अधोसंरचना
↓
अधिक उद्योग एवं निजी निवेश
↓
अधिक रोजगार
↓
अधिक उत्पादन
↓
अधिक निर्यात
↓
अधिक टैक्स संग्रह
↓
मध्यप्रदेश के लिए अधिक विकास संसाधन
इस दृष्टि से इंदौर में किया गया अतिरिक्त सार्वजनिक निवेश केवल स्थानीय विकास का माध्यम नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की भविष्य की आर्थिक क्षमता बढ़ाने का साधन बन सकता है।
राज्य वित्त आयोग से प्रमुख मांगें
सांसद शंकर लालवानी ने राज्य वित्त आयोग से आग्रह किया कि इंदौर की आर्थिक क्षमता, क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की विकास आवश्यकताओं को देखते हुए आगामी वित्त आयोग की अनुशंसाओं में निम्न विशेष प्रावधान शामिल किए जाएं—
- इंदौर के लिए 1% विशेष अनुदान
बेंगलुरु की तर्ज पर इंदौर को सामान्य वित्तीय व्यवस्था के अतिरिक्त 1% विशेष अनुदान उपलब्ध कराया जाए।
- इंदौर नगर निगम के वित्तीय हिस्से में 5 गुना वृद्धि
तेजी से बढ़ते महानगर की आवश्यकताओं को देखते हुए नगर निगम की वर्तमान वित्तीय हिस्सेदारी में 5 गुना बढ़ोतरी की जाए।
- इंदौर महानगरीय क्षेत्र के लिए पृथक विशेष अनुदान
पूरे महानगरीय क्षेत्र के एकीकृत विकास के लिए महानगरीय क्षेत्र/महानगरीय प्राधिकरण को पृथक वित्तीय प्रावधान दिया जाए।
- महानगरीय क्षेत्र में शामिल ग्रामीण निकायों के लिए 1% विशेष अनुदान
महानगरीय क्षेत्र में शामिल ग्रामीण निकायों को सामान्य ग्रामीण अनुदान के अतिरिक्त 1% विशेष अनुदान दिया जाए।
- उच्च आर्थिक क्षमता वाले क्षेत्रों के लिए निवेश-आधारित वित्तीय मॉडल
ऐसे क्षेत्रों में जहां सार्वजनिक निवेश से भविष्य में आर्थिक गतिविधि और कर संग्रह बढ़ने की अधिक संभावना है, वहां निवेश की संभावित आर्थिक वापसी को ध्यान में रखते हुए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की नीति विकसित की जाए।
सांसद शंकर लालवानी का संदेश
«“इंदौर को अधिक हिस्सा देना सरकार पर अतिरिक्त बोझ नहीं है। यदि ₹2 के अतिरिक्त अनुदान से ₹8 के टैक्स की क्षमता विकसित होती है, तो इंदौर में किया गया निवेश मध्यप्रदेश की भविष्य की आय बढ़ाने वाला निवेश है। इंदौर को वैश्विक महानगर बनाना केवल इंदौर की जरूरत नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आर्थिक शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता है।”»
सांसद शंकर लालवानी ने राज्य वित्त आयोग से आग्रह किया कि इंदौर नगर निगम, इंदौर महानगरीय क्षेत्र तथा महानगरीय क्षेत्र में शामिल ग्रामीण निकायों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधानों को आगामी वित्त आयोग की अनुशंसाओं में प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाए।
