विदेशी मेहमानों के मन में छायी प्रदेश कीओडीओपी फसलें विदेशी मेहमान हुए प्रभावित
रीवा के जीआई टैग सुंदरजा आम सहित विविध प्रजातियों का स्वाद लेकर अभिभूत हुए विदेशी प्रतिनिधि
मृगनयनी, प्रकृत सिल्क और हेम्प क्लोदिंग के स्टॉलों पर विदेशी प्रतिनिधियों ने दिखाई विशेष रुचि
इंदौर, 10 जून 2026। इंदौर में 9 से 13 जून 2026 तक आयोजित ब्रिक्स देशों के महत्वपूर्ण कृषि कांफ्रेंस में सहभागी बनने आए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों एवं विदेशी मेहमानों ने मंगलवार को इंदौर के प्रसिद्ध ग्रामीण हाट बाजार का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट कृषि उत्पादों, पारंपरिक हस्तशिल्प, प्राकृतिक खेती आधारित उत्पादों तथा एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के अंतर्गत विकसित उत्पादों का अवलोकन किया।
विदेशी प्रतिनिधियों के ग्रामीण हाट आगमन पर उनका मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप आत्मीय स्वागत किया गया। अतिथियों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया तथा जनजातीय कलाकारों द्वारा मनमोहक लोक एवं जनजातीय नृत्य प्रस्तुत कर मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया। जनजातीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य ने विदेशी प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। अनेक प्रतिनिधि स्वयं भी नृत्य दल के साथ शामिल हुए और जनजातीय धुनों पर उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए।
ग्रामीण हाट में मध्यप्रदेश की कृषि विविधता, स्थानीय उद्यमिता, महिला स्व-सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, मूल्य संवर्धन आधारित कृषि मॉडल तथा प्रदेश की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा को प्रदर्शित किया गया था। विदेशी प्रतिनिधियों ने विभिन्न स्टॉलों पर जाकर उत्पादों की जानकारी प्राप्त की तथा उत्पादकों से संवाद भी किया।
भ्रमण के दौरान ओडीओपी के अंतर्गत प्रदर्शित बुरहानपुर जिले के केले से निर्मित मूल्य संवर्धित उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। प्रतिनिधियों ने केला चिप्स, केला कुकीज़ तथा केले के रेशों से निर्मित वस्त्रों के बारे में जानकारी प्राप्त की और कृषि आधारित प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की इस पहल की सराहना की।
बालाघाट जिले के स्टॉल पर प्रदर्शित जीआई टैग प्राप्त चिन्नौर चावल के साथ-साथ रीवा जिले के जीआई टैग प्राप्त सुंदरजा एवं अन्य प्रजातियों के आमों ने भी विदेशी मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिनिधियों ने विभिन्न आम प्रजातियों का स्वाद चखा तथा उनकी गुणवत्ता, स्वाद एवं सुगंध की प्रशंसा की।
झाबुआ जिले के स्टॉल पर साठी मक्का, दूध मोगर मक्का, देशी उड़द एवं अरहर जैसी पारंपरिक फसलों तथा लंबे रेशों वाले कपास की जानकारी दी गई। मंडला जिले में मिलेट क्वीन लहरी बाई द्वारा संरक्षित दुर्लभ श्रीअन्न (मिलेट) किस्मों, नीमच की औषधीय एवं मसाला फसलों, नरसिंहपुर के करेली के पारंपरिक गुड़, छिंदवाड़ा के वन एवं फल उत्पादों तथा प्राकृतिक खेती आधारित उत्पादों में भी विदेशी प्रतिनिधियों ने विशेष रुचि दिखाई।
ग्रामीण हाट में कृषि उत्पादों के साथ-साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा भी विदेशी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र रही। मृगनयनी के स्टॉल पर प्रदर्शित चंदेरी, महेश्वरी एवं कोसा वस्त्रों, बाघ प्रिंट तथा गोंड चित्रकला की विदेशी मेहमानों ने विशेष सराहना की। वहीं प्रकृत सिल्क स्टॉल पर प्रदर्शित मलबरी सिल्क एवं तसर सिल्क से निर्मित परिधानों और हस्तकरघा उत्पादों में भी प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने पारंपरिक बुनाई कला, प्राकृतिक रेशों की गुणवत्ता तथा स्थानीय बुनकरों की शिल्पकला की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सतत आजीविका का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। हेम्प क्लोदिंग स्टॉल पर प्रदर्शित पर्यावरण-अनुकूल वस्त्रों ने भी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया, जहां उन्हें कम पानी में तैयार होने वाले टिकाऊ एवं प्राकृतिक वस्त्रों की विशेषताओं से अवगत कराया गया।
ग्रामीण हाट में शुद्ध प्राकृतिक शहद, ए-2 दुग्ध उत्पाद, हर्बल उत्पाद, गोबर आधारित पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तथा जैव-इनपुट संसाधन केंद्रों की अवधारणा का भी प्रदर्शन किया गया।
प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट को मध्यप्रदेश की कृषि समृद्धि, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण तथा ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट मंच बताते हुए इसकी सराहना की। भ्रमण के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के कृषि एवं ग्रामीण विकास मॉडल को नजदीक से समझा तथा स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, विविधता और नवाचार की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, वस्त्र, प्राकृतिक उत्पादों एवं मूल्य संवर्धित खाद्य सामग्री का अवलोकन करने के साथ-साथ खरीदारी भी की तथा उत्पादकों से सीधे संवाद कर उनके निर्माण एवं प्रसंस्करण की जानकारी प्राप्त की।
ग्रामीण हाट में आगंतुकों को ग्रामीण जीवन शैली का अनुभव कराने के उद्देश्य से पारंपरिक खाटों पर बैठक व्यवस्था की गई थी। साथ ही स्थानीय कृषि एवं ग्रामीण उत्पादों से तैयार पारंपरिक नाश्ते का भी विशेष प्रबंधन किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों ने स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और ग्रामीण परिवेश से जुड़ी इस अनूठी आतिथ्य परंपरा की सराहना की।
