‘पानी वाले बाबा’ के रूप में विख्यात पूर्व विधायक अश्विन जोशीजी का निधन

By Abhishek Raghuvanshi
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यह एक अत्यंत दुखद समाचार है। इंदौर की राजनीति के एक अध्याय का अंत हो गया है। ‘पानी वाले बाबा’ के रूप में विख्यात पूर्व विधायक अश्विन जोशीजी का निधन शहर के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक अश्विन जोशी का हृदयाघात से आज सुबह निधन हो गया है। उनका बेटा विदेश से आएगा उसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। इंदौर के क्षेत्र क्रमांक तीन से तीन बार विधायक रहे और इस क्षेत्र में पेयजल संकट के दिनों में बस्तियों में पानी पहुंचाने के लिये इतने टैंकर दौड़ाए कि अश्विन बाबा से नाम ही पानी वाले बाबा हो गया।
आज शुक्रवार की सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा
था। परिवार के सदस्य तत्काल शेल्बी हॉस्पिटल
लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने पूरे प्रयास किए
लेकिन हार्ट ने काम करना ही बंद कर दिया। काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।

शजन-जन के नेता, ‘पानी वाले बाबा’ श्री अश्विन जोशी जी आज इंदौर ने अपने एक सच्चे जनसेवक और जुझारू व्यक्तित्व को खो दिया है।
अश्विन जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि इंदौर की गलियों और मोहल्लों की बुलंद आवाज़ थे। उन्हें “पानी वाले बाबा'” के नाम से जाना जाता था क्योंकि उन्होंने जल संकट के दौर में जनता की प्यास बुझाने के लिए जो संघर्ष किया, उसे इंदौर कभी नहीं भूल पाएगा।

उनकी विरासत:

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सादगी की मिसाल: बड़े पद पर रहने के बावजूद वे हमेशा ज़मीन से जुड़े रहे।

संघर्षशील नेतृत्व:जनता के हक की लड़ाई के लिए वे हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे।

पानी के लिए समर्पण: शहर के जल प्रबंधन और गरीबों तक पानी पहुँचाने के उनके प्रयासों ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बनाया।

“पद तो आते-जाते रहते हैं, पर जो जनता के दिलों में बस जाए, वही असली जननेता है।” अश्विन जी ने इस बात को अपने जीवन से सिद्ध किया।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके शोक संतप्त परिवार व समर्थकों को यह आघात सहने की शक्ति दें

संघर्षशील छात्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अश्विन जोशी यदि विधायक बने तो उसका श्रेय उनके काका-वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश जोशी को जाता है। जिस तीन नंबर से वो चुनाव लड़ते रहे उसी सीट से अश्विन को टिकट उन्हीं की बदौलत मिला था।
पिछले विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इस सीट से दावेदारी की थी लेकिन दिग्विजय सिंह सहित प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्व महेश जोशी की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके पुत्र पिंटू (दीपक) जोशी को टिकट दिया था, यह बात अलग है कि इस सीट से जीते भाजपा प्रत्याशी गोलू शुक्ला।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए उनका नाम भी चर्चा में रहा, अधिकांश कांग्रेसजन भी उनके नाम पर सहमत थे कि सत्तारुढ़ दल से लड़ने के लिए ऐसा ही जुझारू अध्यक्ष होना चाहिए, संगठन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की इस भावना को नजरअंदाज कर दिया। भाजपा ही नहीं अपने दल के नेताओं के गलत निर्णय की सार्वजनिक रूप से बखिया उधेड़ने वाले जोशी तो दिग्विजय सिंह से पंगा लेने में भी नहीं हिचकिचाए।

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