आज देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर, मध्यप्रदेश अपने स्थापना दिवस के पावन अवसर पर उस महान परंपरा को स्मरण कर रहा है जिसकी आधारशिला माँ अहिल्याबाई होलकर के उज्ज्वल, मानवीय और जनकल्याणकारी जीवन से प्रेरित है। विश्वविद्यालय अपनी 62 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुका है और इन छह दशकों में उसने शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की ऐसी मिसालें स्थापित की हैं, जो पूरे देश को दिशा प्रदान करती हैं। माँ अहिल्याबाई ने अपने शासनकाल में न्याय, विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और मानवता को जिस ऊँचाई तक पहुँचाया, उसी धरोहर को यह विश्वविद्यालय आज तक अपने हर निर्णय और हर शैक्षणिक पहल में जीवंत किए हुए है।
इन्हीं मूल्यों और अहिल्याबाई की मानवतावादी दृष्टि के प्रतिबिंब स्वरूप विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लेते हुए जनजातीय अध्ययनशाला की स्थापना की। यह विभाग केवल एक शैक्षणिक इकाई नहीं, बल्कि वह भावनात्मक संकल्प है जो सदियों से उपेक्षित रहे भारत के जनजातीय समाज को उनकी वास्तविक गरिमा, ज्ञान, संस्कृति और इतिहास के साथ मुख्यधारा की शिक्षा में स्थान दिलाने की दिशा में उठाया गया। जनजातीय समाज ने संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवनशैली, लोकज्ञान और राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है, परंतु मुख्यधारा के इतिहास, न्यायिक विमर्श और शैक्षणिक अध्ययनों में उनके जीवन और परंपराओं को उतनी जगह कभी नहीं मिली। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने इस कमी को समझा और इसे पूरा करने हेतु जनजातीय अध्ययनशाला की स्थापना एक प्रेरक शुरुआत बन गई।
जनजातीय अध्ययनशाला ने देश में पहली बार तीन विशिष्ट कार्यक्रमों M.A. (Tribal Studies), MBA (Tribal Development and Management) और Ph.D. (Tribal Studies) को एक साथ प्रारंभ कर एक नया शैक्षणिक इतिहास रचा है। M.A. कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, इतिहास, समाज, प्रशासन और अर्थव्यवस्था का व्यापक अध्ययन कराया जाता है। MBA कार्यक्रम जनजातीय विकास परियोजनाओं, NGO प्रबंधन, CSR, नीतिगत योजनाओं और जनजातीय क्षेत्रों में लीडरशिप को विकसित करने वाला देश का अनूठा पाठ्यक्रम है। वहीं Ph.D. कार्यक्रम जनजातीय जीवन, संस्कृति, भाषाओं, ज्ञान–विज्ञान, सामाजिक संरचना और विकास नीतियों पर गहन शोध का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार तीनों स्तरों का एक ही संस्थान में संचालित होना देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को देश का पहला विशिष्ट जनजातीय शिक्षण और अनुसंधान केंद्र बनाता है।
विश्वविद्यालय की 62 वर्षों की गौरवगाथा उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरी है। इस अवधि में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण और नवाचार को अपनी पहचान बनाया है। जनजातीय अध्ययनशाला इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने वाला सबसे जीवंत उदाहरण है। यहाँ न केवल जनजातीय जीवन का अध्ययन होता है, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को फील्ड वर्क, अध्ययन यात्राओं और सामुदायिक संवाद के माध्यम से वास्तविक अनुभव भी प्रदान किया जाता है। जिस प्रकार माँ अहिल्याबाई ने पूरे देश में मानवता, न्याय, सेवा और विकास की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की, उसी प्रकार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय आज शिक्षा और शोध के माध्यम से समाज को नई दिशा दे रहा है।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के स्थापना दिवस पर सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों और हितधारकों को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ अहिल्याबाई की करुणा, न्यायप्रियता और मानव सेवा की भावना इसी प्रकार विश्वविद्यालय को प्रेरित करती रहे और जनजातीय अध्ययनशाला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती रहे। विश्वविद्यालय की 62वीं स्थापना वर्षगाँठ पर हृदय से शुभकामनाएँ।
