
इंदौर। विदेश की पत्रकारिता डेटा आधारित होती है, जबकि भारतीय मीडिया में समाज, कला, साहित्य सहित कई रंग होते हैं। आधुनिक देशों के लिए डेटा एक बड़ी पूंजी के समान है, क्योंकि बड़े फैसले इसी डेटा पर आधारित होते हैं। चीन अपने डेटा को उजागर नहीं होने देता। हमारे देश में भी डेटा भविष्य में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। यह बात सूचना प्रसारण मंत्रालय के प्रिंसिपल एडवाइजर तथा सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड एंड होलिस्टिक स्टडीज नई दिल्ली के निदेशक के.ए. बदरीनाथ ने कही। वे इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित सोशियो मीडिया संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मीडिया टेक्नोलॉजी, सिविलाइजेशन एंड पब्लिक डिसकोर्स विषय पर आयोजित इस संवाद में मीडिया के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे दखल पर भी विचार मंथन हुआ

संवाद कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार हेमंत उपाध्याय ने वार्ताकार की भूमिका अदा की। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अब पत्रकारिता तकनीक से जुड़ गई है। खबरों का प्लेटफार्म जो भी हो, पर लोगों की प्रतिक्रिया त्वरित रूप से व्यक्त होती है। एक गलत खबर आपको हीरो से जीरो भी बना सकती है।
