इंदौर के भानगढ़ इलाके में नाले के किनारे खेतों में किसानों द्वारा पालक, धनिया, लौकी, भिंडी, गोभी, पत्तागोभी, टमाटर जैसी कई तरह की सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन खेतों में सिंचाई नाले के पानी से की जा रही है। यह वही पानी है, जिसमें घरेलू गंदगी, औद्योगिक अपशिष्ट, बैक्टीरिया और भारी धातुएं मिली होती हैं।
भानगढ़ क्षेत्र में नाले के पानी से हो रही खेती
जिला प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है
लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हो सकी
इंदौर। इंदौर नगर निगम की गंभीर लापरवाही के कारण भागीरथपुरा में दूषित पानी से 31 रहवासियों की मौत ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। कुछ मरीज अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। नगर निगम एवं प्रशासन की ओर से दावा किया जा रहा है कि हालात धीरे-धीरे काबू में आ रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि शहर में सेहत से जुड़ा एक और गंभीर खतरा लगातार पनप रहा है।
यह खतरा भानगढ़ क्षेत्र में नाले के दूषित पानी से की जा रही सब्जियों की खेती का है, जिसे विशेषज्ञ सीधे तौर पर ‘जहरीली खेती’ बता रहे हैं। ये जहरीली सब्जियां कुछ मंडियों में खुले आम जिम्मेदारों के सामने रोजाना बिक रही हैं। इससे होने वाली गंभीर बीमारियां सीधे हमारी थाली तक पहुंच रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि इस पर कुछ साल पहले प्रशासन ने कार्रवाई की थी, लेकिन यह समस्या जड़ से खत्म नहीं हो पाई।
नाले के पानी से सिंचाई
भानगढ़ इलाके में नाले के किनारे खेतों में किसानों द्वारा पालक, धनिया, लौकी, भिंडी, गोभी, पत्तागोभी, टमाटर जैसी कई तरह की सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन खेतों में सिंचाई नाले के पानी से की जा रही है। यह वही पानी है, जिसमें घरेलू गंदगी, औद्योगिक अपशिष्ट, बैक्टीरिया और भारी धातुएं मिली होती हैं। इसमें ई-कोलाई, साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया और हेपेटाइटिस-ए और ई जैसे वायरस पाए जाते हैं।
बैक्टीरिया और वायरस अंदर तक समा जाते हैं
जब इसी पानी से सब्जियों की सिंचाई की जाती है, तो ये बैक्टीरिया और वायरस सब्जियों के अंदर तक समा जाते हैं। यही ‘जहरीली’ सब्जियां बिना किसी रोक-टोक मंडियों और बाजारों तक पहुंच रही हैं। वहां से शहरवासी इन्हें खरीदकर घर ले जाते हैं। ऐसी सब्जियों का सेवन करने से डायरिया, पेचिश, टाइफाइड, हैजा और फूड पाइजनिंग जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कमजोर इम्युनिटी वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
उबले पानी से धोना काफी नहीं
सब्जियों को सिर्फ उबले पानी से धोना काफी नहीं होता, क्योंकि इससे हानिकारक आंतरिक कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। बीमारियों से बचने का सबसे जरूरी तरीका सब्जियों की सही सफाई है। सब्जियों को कम से कम तीन बार रनिंग वाटर यानी बहते पानी में धोएं। गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक डालकर धोएं। पोटेशियम परमैग्नेट में 10 मिनट तक भिगोकर रखें।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा
नालों में औद्योगिक अपशिष्ट भी मिलता है, जिसमें लेड (सीसा), कापर जैसे हेवी मेटल्स होते हैं। इनसे धीरे-धीरे जहर का असर होता है, जो किडनी, लिवर, दिमाग सहित शरीर के लगभग हर अंग के लिए नुकसानदायक है। शुरुआती लक्षण साफ नहीं होते लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा ज्यादा होता है। बच्चों में शरीर का रिजर्व कम होता है।
नाले का पानी फसल ही नहीं मिट्टी को भी खराब करता है
नाले के पानी में भारी धातुएं जैसे केडमियम, मरक्यूरी, लेड होने की ज्यादा संभावना होती है। नाले का पानी सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि मिट्टी को खराब कर देता है। जिस जमीन में नाले का पानी डाला जाता है, वहां खेती की गुणवत्ता और उपजाऊपन खत्म कर देता है। किसान अगर ऐसी जमीन पर खेती करता है, तो वह जमीन बंजर, फसल खराब होने के साथ बीमारियां फैलने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। जिस इलाके से नाले का पानी बहता है, वहां भविष्य में खेती करना भी मुश्किल हो जाता है। मिट्टी में कहीं न कहीं हानिकारक तत्व मिल चुके होते हैं। – प्रो. आनंद हरसाना, कृषि महाविद्यालय
