शिप्रा के तटों से लदी, अब बहेगी विकास की गंगा, यमुना और सरस्वती
महाकाल की नगरी परिवर्तन के काल में भी बिखेरेगी विकास की चमक
साहब, उज्जैन में अब सिर्फ घंटे और घड़ियाल की आवाज़ ही नहीं, फैक्ट्रियों और मिलों की चहल-पहल भी गूंजेगी।
₹3060 करोड़ के सिंहस्थ संगम से जगमगा रही है राजा महाकाल की नगरी
उज्जैन के दो अधिकारी, सपनों को हकीकत में बदलते हुए
सबके समय को बदलने वाले महाकाल की नगरी अब शिप्रा के नाम के साथ-साथ विकास की गंगा, यमुना और सरस्वती बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
अब तक जिस नगरी ने सभी को कुछ न कुछ दिया है, वही नगरी आज अपने विराट स्वरूप को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। एक समय था जब उज्जैन हर मामले में केवल इसलिए पीछे रह जाता था क्योंकि यह एक धार्मिक नगरी मानी जाती थी।
यहां रोजगार, प्रॉपर्टी, फैक्ट्री, व्यवसाय और नौकरियों के अवसर लगभग शून्य के समान थे। लेकिन अब यही शून्य एक बड़े अवसर में बदल चुका है और उज्जैन विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाने की दहलीज पर खड़ा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन के भाग्योदय की नई इबारत लिखी जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है मानो यह स्वयं महाकाल की इच्छा हो कि उनकी नगरी के लोगों का भी समय बदले और वे विकास की मुख्यधारा के साथ आगे बढ़ें।
हालांकि इस समय सभी का ध्यान सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर केंद्रित है, लेकिन इसके साथ-साथ उज्जैन के समग्र विकास कार्यों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
संभागायुक्त आशीष सिंह को उज्जैन को बेहतर से बेहतरीन बनाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में वे दिन-रात मेहनत कर उन सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटे हैं, जो उनके विज़न का हिस्सा हैं।
वे मानते हैं कि सभी विभागों के बीच समन्वय और संवाद के माध्यम से ही विकास कार्यों को गति दी जा सकती है। उनकी यही कार्यशैली उन्हें अलग पहचान दिलाती है।
इसी सोच के साथ अपर कलेक्टर राजेश राठौर भी कदम से कदम मिलाकर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अब तक उज्जैन की झोली में 246 नई औद्योगिक इकाइयाँ लाई जा चुकी हैं।
उज्जैन संभाग ने उनकी मेहनत, ईमानदारी और बेहतर प्रशासनिक कार्यशैली के चलते कई बड़ी कंपनियों का निवेश आकर्षित करने में सफलता हासिल की है।
अब तक उज्जैन की नगरी में लगे विकास के चार चाँद
- पिछले ढाई वर्षों में 246 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना।
- लगभग ₹16,150 करोड़ से अधिक का निवेश।
- विक्रम उद्योगपुरी फेज-1 एवं फेज-2 और मेडिकल डिवाइस पार्क में निवेश।
- PepsiCo, VECV (Volvo-Eicher Commercial Vehicles) और Alkem Laboratories जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों की बड़ी विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित हो रही हैं।
