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ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में आए विदेशी मेहमानों ने होलकर राज में कम्पोस्ट विधि से तैयार ऑर्गेनिक खेती के बारे में जाना

ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा की नक्काशी, सुन्दरता और भव्यता को देखकर मंत्रमुग्ध हुए राजवाड़े के गणेश हॉल, दरबार हॉल सहित विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया और सामूहिक चित्र लिये पुण्यश्लोका और कुशल प्रशासिका देवी अहिल्या बाई होलकर की राजव्यवस्था और सेवा कार्यों को समझा इंदौर शहर में 9 जून से 13 जून तक आयोजित ब्रिक्स देशों […]

ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में आए विदेशी मेहमानों ने होलकर राज में कम्पोस्ट विधि से तैयार ऑर्गेनिक खेती के बारे में जाना

ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा की नक्काशी, सुन्दरता और भव्यता को देखकर मंत्रमुग्ध हुए

राजवाड़े के गणेश हॉल, दरबार हॉल सहित विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया और सामूहिक चित्र लिये

पुण्यश्लोका और कुशल प्रशासिका देवी अहिल्या बाई होलकर की राजव्यवस्था और सेवा कार्यों को समझा

इंदौर शहर में 9 जून से 13 जून तक आयोजित ब्रिक्स देशों के महत्वपूर्ण कृषि सम्मेलन में सहभागिता कर रहे विदेशी मेहमानों ने आज सुबह होलकरकालीन ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा का भ्रमण कर कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। साथ ही होलकर राज की कृषि पद्धति और शासन व्यवस्था के बारे में जाना। राज्य शासन द्वारा विदेशी मेहमानों का स्वागत मालवी परंपराओं के साथ पुष्पवर्षा कर और अंगवस्त्र पहनाकर किया गया।


इथोपिया, ब्राजील, साउथ अफ्रीका, इंडोनेशिया आदि देशों से आए विदेशी मेहमान बुधवार सुबह शहर का गौरव कहे जाने वाले प्राचीन इमारत राजवाड़ा पहुँचे। सभी मेहमानों का स्वागत पदाधिकारियों द्वारा किया गया। विदेशी मेहमानों ने होलकरकालीन ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा के गणेश हॉल, दरबार हाल सहित विभिन्न कक्षों का अवलोकन किया और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। प्राचीन इमारत राजवाड़े की निर्माण शैली और उसकी भव्यता को देखकर मंत्रमुग्ध हुए। इतिहासकार श्री जफ़र अंसारी, श्रीमती शर्वाणी जोशी सहित सुश्री संघमित्रा पिपलोदा द्वारा विदेशी मेहमानों को बताया गया कि होलकर राज में कृषि की उत्तम व्यवस्था थी।

यहाँ पर कम्पोस्ट विधि के द्वारा जैविक खेती की जाती थी, जिसमें कृषि अवशेष, जैविक कचरा, गोबर और राख आदि से जैविक खाद बनाई जाती थी। इसका उल्लेख ब्रिटिश सरकार में कैम्ब्रिज में पढ़े सर अल्बर्ट हावर्ड ने अपनी पुस्तकों में किया। उन्होंने इंदौर में रहकर होलकर कालीन कृषि व्यवस्था को करीब से देखा और जाना। इतिहासकार द्वारा विदेशी मेहमानों को विभिन्न दस्तावेज एवं वस्तुओं द्वारा बताया गया कि होलकर राज में जनगणना कैसे होती थी। उस समय राजा-महाराजा और दरबारियों की क्या पोशाक होती थी। जब राजा दरबार में आते थे, तो कर्मचारियों द्वारा किस तरह से उसकी घोषणा की जाती थी। विदेशी मेहमानों को पुण्यश्लोका और कुशल प्रशासिका देवी अहिल्याबाई होलकर काल में कौन-कौन से कल्याणकारी और सामाजिक कार्य हुए, इसके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी गई। महेश्वर में निर्मित महेश्वरी साड़ियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।


इतिहासकारों के मुताबिक करीब पौने तीन सौ वर्ष पूर्व में मल्हारराव होलकर ने इंदौर के ऐतिहासिक एवं भव्य राजवाड़े का निर्माण किया था। यह उस समय की सबसे पहली और बड़ी इमारत थी। इस सात मंजिला इमारत को महल कच्हरी और महल वाड़ा भी कहा जाता था। यह पर दरबार भी लगता था। विदेशी मेहमानों को बताया कि इंदौर का नाम यहाँ पर स्थित प्राचीन मंदिर इन्द्रेश्वर के नाम पर पड़ा। इस शहर को पहले इंदूर और बाद में इंदौर नाम चलन में आया। विदेशी मेहमानों ने राजवाड़े में मालवी व्यंजनों का लुफ्त उठाया। उन्होंने राजवाड़े की दीर्घाओं और मुख्यद्वार पर सामूहिक चित्र खिचाएं। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल, स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अर्थ जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

Abhishek Raghuvanshi
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