तपोनिष्ठ संत श्री श्री 1008 राजगुरु जी महाराज के सानिध्य में कथा का भव्य समापन, 11 जोड़ों की शादी संपन्न

By Abhishek Raghuvanshi
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विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी, महाराज श्री ने दिया प्रतिवर्ष आयोजन जारी रखने का संदेश

इंदौर। तिल्लौर–शिवनगर मार्ग स्थित संकट मोचन हनुमंत मंदिर, खेड़ापति आश्रम पिपलिया लोहार में आयोजित विराट हनुमंत मेला मंगलवार को भावनाओं, भक्ति और सेवा के अद्भुत संगम के साथ उस समय स्मरणीय बन गया, जब तपोनिष्ठ संत श्री श्री 1008 राजगुरु जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा का समापन विशाल भंडारे के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। समापन दिवस पर आयोजित सर्व समाज निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन में 11 जोड़ों का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पावन परिणय सम्पन्न हुआ। नवविवाहित जोड़ों को दैनिक उपयोग की अनेक आवश्यक वस्तुएं उपहार स्वरूप भेंट की गईं, जिससे उनके नए जीवन की शुरुआत सहज और सुदृढ़ हो सके। इस अवसर पर महाराज श्री ने सभी जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि यह सेवा कार्य केवल एक बार का आयोजन नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण है और अब इसे प्रतिवर्ष निरंतर जारी रखा जाएगा।


पूरे आयोजन के दौरान भावनाओं का ऐसा वातावरण बना रहा, जहां एक ओर नवजीवन के प्रारंभ की खुशी थी, वहीं दूसरी ओर कथा समापन की भक्ति में डूबा हुआ जनसमूह दिखाई दिया। भागवत कथा के समापन अवसर पर प्रख्यात कथाकार पं. विनोद शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है, जो व्यक्ति को धर्म और सत्य के पथ पर अग्रसर करता है।
इस अवसर पर विपिन वानखेड़े, मनोज ठाकुर, घनश्याम पाटीदार, रूपेश बाघमोरे, खुमान सिंह पटेल, संतोष गवलाना, विक्रम सिंह सोलंकी, उमराव सिंह, मनोहर मस्कारा, बलराम पाटीदार, सेठ संतोष पाटीदार, भगवान सिंह ठाकुर, शेखर गौड़, विजय पाटीदार, धर्मेंद्र ठाकुर सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे और आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
समन्वयक बीडी तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों का समापन मंगलवार को हो चुका है, जबकि विराट हनुमंत मेले का औपचारिक समापन बुधवार को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए अभिमंत्रित रुद्राक्ष वितरण अभी भी जारी है, जिसे लेकर भक्तों में विशेष उत्साह बना हुआ है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि समाज में समरसता, सहयोग और सेवा की भावना को सशक्त करने वाला प्रेरणास्रोत बन गया, जहां तपोनिष्ठ संत श्री श्री 1008 राजगुरु जी महाराज के सानिध्य में भक्ति और मानवता का सुंदर संगम साकार हुआ।

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