इंदौर की खुड़ैल तहसील में एक चपरासी बाबू की कुर्सी पर बैठकर पुराने अधिकारियों की टीप बनाने सहित अन्य काम कर रहा था। इसका खुलासा उस समय हुआ जब एडीएम रोशन राय ग्राम भिंगारिया (पटवारी हल्का सेमल्यारायमल) में सितंबर 2025 में हुए 18.031 हेक्टेयर जमीन के फर्जी नामांतरण घोटाले की जांच करने वहां पहुंचे। दो दिन पहले जब वे कार्यालय पहुंचे तो यह देखकर चौंक गए कि मुख्य बाबू की कुर्सी पर चपरासी परवेज खान बैठा था।
उन्हें जानकारी दी गई कि परवेज ही पुराने अधिकारियों की टीप बनाने सहित अन्य काम करता था। एडीएम ने एसडीएम प्रियंका चौरसिया को मामले की जांच करने और प्यून को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम चौरसिया ने प्यून परवेज खान से सभी काम छीन लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी की आड़ में यहां दस्तावेजों में कई तरह की गड़बड़ियां होती थीं और कोई फंसता भी नहीं था। मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा लापरवाही बरतने पर पटवारी रोहित तिवारी और बाबू मीना यादव को पहले ही सस्पेंड कर चुके हैं।
गलत लोगों के नाम कर दी जमीन
शिकायतकर्ता संजीव कानूनगो और सुरेशचंद्र कानूनगो ने बताया कि हम स्व. रामकुंवर बाई के असली और वैध वारिस हैं। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में अवैध तरीके से अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। ऐसा पहले भी हो चुका है और जांच के बाद तब भी वह नामांतरण रोका गया था। शिकायतकर्ताओं को आशंका है कि इस खेल में कुछ बड़े लोग भी शामिल हैं। उनका कहना है कि मामला पुलिस के पास जाने के बाद ही असली खुलासा हो पाएगा।
नायब तहसीलदार के पास कर्मचारी नहीं
खुड़ैल को इंदौर मुख्यालय से अलग करने के बाद बिल्डिंग तो मिल गई, लेकिन स्टाफ पूरा नहीं मिला। इसी कमी का बहाना बनाकर चपरासी खान को बोर्ड का सारा काम सौंप दिया गया था। जांच में सामने आया है कि नायब तहसीलदार के पास तो एक भी कर्मचारी नहीं है और जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा था। हालांकि, अब अधिकारी दूसरे विभागों से कर्मचारियों का इंतजाम कर यहां नया स्टाफ जुटाने में लगे हैं।
