किन्नर समुदाय को नेग मांगने का अधिकार नहीं.. हाईकोर्ट का आदेश

By Abhishek Raghuvanshi
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि किन्नर समुदाय को मांगलिक अवसरों पर जबरन ‘नेग’ या ‘बधाई’ वसूली का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने इसे भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक कृत्य बताया है। जबरन वसूली अब अपराध .
फैसले के प्रमुख बिंदु:
कानूनी अधिकार नहीं: किन्नर समुदाय के पास पारंपरिक रूप से ‘नेग’ या बधाई मांगने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
अपराधिक कृत्य: यदि नेग के लिए जबरदस्ती की जाती है या धमकी दी जाती है, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
याचिका खारिज: कोर्ट ने रेखा देवी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की वसूली केवल कानून के दायरे में ही की जा सकती है।
सुरक्षा का अधिकार: जहां एक तरफ जबरन वसूली पर रोक है, वहीं ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें भेदभाव और शोषण से सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।
नोट: यह फैसला 28 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।

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