इंदौर जिले के कई ग्रामों ने पूर्ण साक्षरता की दिशा में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धि
समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आज कलेक्टर कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर शिवम वर्मा ने की। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सहित संबंधित अधिकारियों ने योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए तथा विभिन्न पोर्टलों पर अद्यतन जानकारी समय पर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए, इसके लिए सतत मॉनिटरिंग और फील्ड विज़िट आवश्यक हैं।
जिला परियोजना समन्वयक एवं जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाने का कार्य किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप वर्ष 2022 से 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष में दो बार मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता का मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इंदौर जिले के कई ग्रामों ने पूर्ण साक्षरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विकासखंड इंदौर के ग्राम खत्रीखेड़ी, टिगरियाराव, विकासखण्ड महू के ग्राम प्रेमनगर, कोलम्बा, कनाड़, गौकन्या, भडक्या, कुण्ड, कोपरबेल, उमरिया, गोलखेड़ा, विकासखण्ड देपालपुर के ग्राम सिरोंज्या, नौगांवा, खेड़ा, काकवा, पलसोडा, कुनगारा और विकासखण्ड सांवेर के ग्राम हरियाखेड़ी, कजलाना, बिसाखेड़ी, बावल्याखेड़ी, टूमनी, गुलावट, मालीखेड़ी, ब्राम्हणखेड़ी, लोहागल, महाराजगंज खेड़ा, खापराखेड़ी व सिलोदाखुर्द गांव शत-प्रतिशत साक्षरता की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। इन ग्रामों में व्यापक जनभागीदारी, शिक्षकों की सक्रिय भूमिका और प्रशासनिक सहयोग के कारण यह सफलता संभव हो पाई है।
कलेक्टर श्री वर्मा ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शेष ग्रामों में भी इसी प्रकार के प्रयास कर उन्हें पूर्ण साक्षरता की श्रेणी में लाया जाए। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हो और कोई भी व्यक्ति साक्षरता से वंचित न रहे।
