इंदौर लोकायुक्त की ऐतिहासिक पहल, घूसखोरों को बचाने वाले 21 फरियादियों पर केस, हॉस्टाइल हुए गवाहों की अब खैर नहीं

By Abhishek Raghuvanshi
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बयानों से पलटने वाले 21 फरियादियों पर केस दायर कर पुलिस ने कोर्ट में घसीटा है। यह पहला अवसर है जब लोकायुक्त पुलिस फरियादियों को ही आरोपित बनाने जा रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त का सर्जिकल स्ट्राइक
बयान बदलने वाले 21 फरियादी खुद बनेंगे आरोपी
साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने वालों पर चलेगा मुकदमा
इंदौर। भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही जंग में फरियादी ही कमजोर कड़ी बन रहे हैं। लोकायुक्त पुलिस ने उन फरियादियों (शिकायतकर्ताओं) को पकड़ा है जो घूसखोरों को पकड़वाकर कोर्ट में बयानों से मुकर चुके हैं। बयानों से पलटने वाले 21 फरियादियों पर केस (इस्तगासा) दायर कर पुलिस ने कोर्ट में घसीटा है। यह पहला अवसर है जब लोकायुक्त पुलिस फरियादियों को ही आरोपित बनाने जा रही है। लोकायुक्त पुलिस के इस कदम से भ्रष्टाचार के मामलों की दिशा बदल सकती है।
समझौते की वजह से धराशायी होते केस
शिकायतकर्ता ट्रैप के वक्त तो मजबूती से खड़े रहते हैं लेकिन जैसे ही प्रकरण कोर्ट पहुंचता है, पीड़ित घूसखोर अफसर-कर्मचारी से समझौता कर लेता है। इस कारण ट्रैप, रिकॉर्डिंग और नोट जब्ती जैसे सबूत होने के बावजूद लोकायुक्त का केस कोर्ट में धराशायी हो जाता है। लोकायुक्त पुलिस ने 21 केस की सूची तैयार की है जिनमें फरियादी पक्षद्रोही घोषित हुए हैं। करीब 12 साल से लंबित इन प्रकरणों के पीड़ितों को भी आरोपित बनाने के लिए कोर्ट में इस्तगासा पेश कर दिया है।
झूठी गवाही पर सजा का प्रावधान
धारा 383 (BNS) और 340-344 (IPC) के तहत प्रस्तुत इस्तगासा में तीन माह की सजा और अर्थदंड का प्रावधान है। कानून के जानकारों के अनुसार झूठी गवाही, न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करना और साक्ष्य से छेड़छाड़ गंभीर अपराध माना जाता है। एसपी (लोकायुक्त) डा. राजेश सहाय ने 21 प्रकरणों की सूची तैयार की है जिनमें पीड़ित पक्षद्रोही हुआ है। इसमें 9 प्रकरणों से आरोपित बरी कर दिए गए हैं।
बयान बदलने से बरी हुए पुलिसकर्मी और अधिकारी
इसमें एएसआइ रामबहादूर पटेल, एएसआइ बृजपालसिंह कुशवाह, प्रधान आरक्षक संजय गोडाले, एएसआइ अजबसिंह पाल शामिल हैं जिन्हें लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा था। नगर तथा ग्राम निवेश का लिपिक तेजराम कंडारे, पशु चिकित्सक सतीश शाक्य, उपयंत्री (मनरेगा) मुकामसिंह डाबर, डिप्टी रेंजर गवजी हटिला, कार्यपालन (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) यंत्री प्रवेश सोनी, पटवारी दीवाकर त्रिवेदी और जिला समन्वयक मांगीलाल आर्या भी बयान बदलने से बरी हुए हैं।
दबाव और लालच के खिलाफ सख्त कदम
लोकायुक्त एसपी डा. राजेश सहाय के मुताबिक पीड़ितों के पक्षद्रोही होने से कोर्ट में केस कमजोर होता है। इसका फायदा भ्रष्टाचार के आरोपित अफसर-कर्मचारी को मिलता है। कोर्ट ने कई मामलों में आरोपितों को राहत दी है। हालांकि कुछेक केस में शासकीय वकील और साक्ष्यों के दम पर सजा भी हुई है। पक्षद्रोही के मामलों को रोकने के लिए लोकायुक्त ने सख्त कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार आरोपित अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फरियादी पर दबाव व लालच देकर समझौता कर लेता है। फरियादी भी अपना काम निकालकर समझौता कर लेता है।

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