इंदौर में बर्थडे पार्टी और नाइट आउट पार्टी में गुलाबी रंग की पुड़िया में पहुंचती है एमडी ड्रग

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर के नामी स्कूलों में 12 से 16 साल के बच्चों में एमडी ड्रग की लत तेजी से बढ़ रही है।
स्कूल और घर के दायरे से बाहर होने वाली पार्टियों में ड्रग का चलन, बच्चे बताते हैं कि पैडलर सामने नहीं आते
एलिट क्लास के बच्चे खर्च के लिए कार्ड इस्तेमाल करते हैं, अभिभावक हिसाब नहीं पूछते
नारकोटिक्स, क्राइम ब्रांच ने कई तस्करों को पकड़ा जो प्लानिंग से छात्रों तक ड्रग पहुंचाते हैं
इंदौर। इंदौर शहर के नामी स्कूलों में एमडी ड्रग का चलन बढ़ता जा रहा है। 12 से 16 वर्ष के बच्चे तेजी से इसकी लत के शिकार हो रहे हैं। इनकी बर्थडे पार्टी और नाइट आउट पार्टी में गुलाबी रंग की पुड़िया में एमडी ड्रग पहुंचती है। विद्यार्थी सीधे तस्कर से संपर्क नहीं करते हैं।
मनोचिकित्सकों के मुताबिक काउंसलिंग में विद्यार्थी बताते हैं कि वे एमडी ड्रग पार्टियों में लेते हैं। यह पार्टी स्कूल और घर के दायरे से बाहर होती हैं, क्योंकि यहां कोई निगरानी नहीं होती है। हम ड्रग पैडलर से सीधे संपर्क नहीं करते हैं। दूसरे स्कूल के छात्रों के माध्यम से हम संपर्क बनाते हैं और इस तरह ड्रग की सप्लाई चेन चलती रहती है। ड्रग पैडलर हमारे सामने कभी आते ही नहीं हैं।
हमें यह नहीं बताया जाता है कि इससे नुकसान हो सकते हैं। इसकी शुरुआत मस्ती या ट्रेंड के तौर पर होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत में बदल जाती है। डॉ. कौस्तुभ बागुल ने बताया कि बच्चों को इसके नुकसान नहीं बताए जाते हैं, यह कहकर इसकी लत लगाई जाती है कि इससे तनाव दूर होगा और सुकून मिलेगा।
माता-पिता नहीं देते हैं ध्यान
विशेषज्ञों के मुताबिक एलिट क्लास के अधिकांश लोग अपने बच्चों की सभी जरूरतें पूरी करते हैं। क्योंकि यह आर्थिक रूप से सक्षम होते हैं। बच्चे जितनी राशि मांगते हैं, यह खर्च के लिए दे देते हैं। कई बच्चों के पास तो कार्ड होते हैं, जिसकी मदद से वे जितना चाहे, उतना खर्च कर सकते हैं। माता-पिता को इस तरह लापरवाह नहीं होना चाहिए। उन्हें बच्चों को चाहे खर्च से नहीं रोकना चाहिए, लेकिन उनसे यह पूछना चाहिए कि वे कहां खर्च कर रहे हैं।
स्कूली विद्यार्थियों को ड्रग्स तस्करी करने वाले आरोपित भी पकड़ाए
बता दें कि नारकोटिक्स, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस द्वारा कई ऐसे तस्करों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जो स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक ड्रग्स पहुंचाते हैं। इसके लिए योजना बनाकर काम करते हैं। इन पार्टियों में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को पहले दूसरे स्कूल के दोस्त ड्रग्स का सेवन करवाते हैं। इसके बाद लत लग जाती है और फिर ये ग्राहक बन जाते हैं।

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