क्या इंदौर भाजपा में सबकुछ ठीक चल रहा है। क्या कांग्रेस का यह दुर्गुण भाजपा के भी प्रवेश कर चुका है। इनका जवाब तो कोई नहीं दे पा रहा है लेकिन लगातार हो रही घटनाओं को जानबूझकर अंजाम दिया जा रहा है।
कभी सत्तन गुरु उखड़ कर चले जाते है, तो कभी गौरव रणदीवे बुजुर्ग हो या युवा नेता दोनों ही इस समय कुंठाओं से मुक्त नजर नहीं आ रहे है।
ऐसा इसलिए भी है कि शहर के प्रथम नागरिक मित्र के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने वालो की खामियां ही इस तरह की स्थिति पैदा कर रही है।
सत्तन जब सत्तारूढ़ से खफा होते है, तो सिंहासन भी डोलने लगता है। महापौर को कई बार उनकी गलतियों के कारण उनके घर तक काफी मांगने जाना पड़ा है।
अब बात करे 2 दिन पहले हुए कार्यक्रम की, तो इस बार तो प्रदेश मंत्री के साथ संघ के ताकतवर शैलेंद्र बरुआ को बेज्जत करने की है।
अभी देखा जाए तो मामला शांत नहीं हुआ है महापौर ने ना तो इस बारे में कुछ कहा है और ना ही सुलह का कोई रास्ता बनाया है
ऐसा सुनने में आ रहा है कि महापौर के साथ अन्य कुछ नेताओं की शिकायत लगातार दिल्ली दरबार तक पहुंच रही है।
