विशेष व्याख्यान एवं विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का हुआ आयोजन
शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, किलाभवन, इंदौर में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं रसायन शास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय जयंती एवं राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान तथा विज्ञान मॉडल एवं प्रोजेक्ट्स प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव के संरक्षण, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वी. पी. बैरागी के मार्गदर्शन तथा रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. नीलू मालवीय के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. ऋषिना नातू ने “आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय का भारतीय विज्ञान एवं उद्योग में योगदान” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आचार्य राय ने भारतीय वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक रसायन विज्ञान और स्वदेशी उद्योगों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान किया। उनका जीवन भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक अनुसंधान, स्वावलंबन और राष्ट्रनिर्माण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि आचार्य राय ने प्राचीन भारतीय रसायन विज्ञान का गहन अध्ययन कर यह स्थापित किया कि भारत में वैदिक एवं उत्तरवैदिक काल से रसायन विज्ञान की समृद्ध परंपरा विद्यमान रही है। उनकी प्रसिद्ध कृति “History of Hindu Chemistry” भारतीय रसायन विज्ञान की प्राचीन उपलब्धियों का प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती है, जिसमें धातु विज्ञान, औषध निर्माण तथा वैज्ञानिक विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
डॉ. नातू ने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति भी होना चाहिए। इसी विचार से प्रेरित होकर आचार्य राय ने बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स की स्थापना की, जो भारत की प्रथम स्वदेशी रासायनिक एवं औषधि निर्माण संस्थाओं में से एक थी। प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव ने कहा कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने ऐसे समय में भारतीय विज्ञान की गौरवशाली परंपरा को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया, जब औपनिवेशिक इतिहास लेखन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों को कमतर आंकने का प्रयास कर रहा था। उन्होंने अपने शोध एवं लेखन से इस भ्रम को दूर किया।
उन्होंने बताया कि आचार्य राय ने मरक्यूरस नाइट्राइट (Mercurous Nitrite) के सफल संश्लेषण सहित नाइट्राइट रसायन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान किए, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिली। उनकी पुस्तक “History of Hindu Chemistry” केवल वैज्ञानिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक चेतना का प्रामाणिक दस्तावेज है। प्राचार्य ने कहा कि आचार्य राय का जीवन सादगी, ज्ञान, चरित्र और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण था। उनका विश्वास था कि किसी वैज्ञानिक की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान और समाज के प्रति समर्पण से होती है। प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वी. पी. बैरागी ने छात्राओं से आचार्य राय के आदर्शों से प्रेरणा लेकर विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. सुचित्रा हरमलकर ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत का गौरव नहीं, बल्कि भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त करती है। विज्ञान को स्वदेशी दृष्टिकोण, नवाचार और मानव कल्याण से जोड़ना ही आचार्य राय के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विशेष व्याख्यान के उपरांत विज्ञान मॉडल एवं प्रोजेक्ट्स प्रदर्शनी आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने रसायन विज्ञान एवं अन्य वैज्ञानिक विषयों पर आधारित अनेक नवाचारपूर्ण मॉडल एवं परियोजनाएं प्रस्तुत कीं।
सुश्री अनिता सोलंकी, रोशनी यादव एवं अनिता पालने ने वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मकता एवं शोध क्षमता का परिचय दिया। वहीं स्थैतिक मॉडल आशिका यादव एवं निशा वर्मा, कार्यशील मॉडल नौशीन शेख एवं रोज़मीन शेख तथा चार्ट प्रस्तुति अनिता गदारिया एवं खुशी केलवा द्वारा तैयार किए गए। प्राध्यापकों ने छात्राओं के वैज्ञानिक प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें नवाचार एवं अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के आयोजन में प्रो. सुचित्रा हरमलकर, प्रो. नीलू मालवीय, प्रो. ललिता गोयल, प्रो. पल्लवी गुप्ता, प्रो. नेहा गुप्ता, प्रो. संध्या दावरे, प्रो. विनीता ओसारी एवं प्रो. गीता अटेरिया का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गीता अटेरिया तथा आभार प्रदर्शन प्रो. पल्लवी गुप्ता ने किया।
