बिहार में भरत तिवारी के इनकाउंटर मामले में नया मोड़ तब आया जब गया निवासी कौशिक रंजन द्वारा बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) में दायर शिकायत को स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 863/IN/2026 जारी की गई। इसके साथ ही मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है।
इधर परिजन इसे फेक एनकाउंटर बता रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने “Well Done Bhojpur Police” लिखकर पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है, वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेता निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इस बीच पूरे मामले पर भोजपुर प्रशासन की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया का इंतजार बना हुआ है। मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा हैं
ये वही भरत तिवारी है जिसे भोजपुर पुलिस ने अपराधी बताते हुए एनकाउंटर कर दिया। भरत कोई अपराधी नहीं एक समाजसेवी था। भरत के पिता एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हैं। भरत की उम्र 26 वर्ष थी। भरत एक शिक्षित व्यक्ति था, जो B.Sc तक पढ़ा था। भरत ने पढ़ाई पूरी करने के बाद काफी समय तक नौकरी की तलाश की पर इस देश की जातिवादी व्यवस्था ने उसे नौकरी से वंचित रखा। भरत ने नौकरी न मिलने के बाद समाज सेवा करना शुरू किया और शादी भी नहीं की। भरत ने काफी समय पहले ही अपना पिंड दान भी करवा लिया था, क्योंकि वो अक्सर समाज कल्याण के लिए सरकारी अधिकारियों के गलत कारनामों को उजागर करता रहता था और उसे लगता भी था कि ये system एक दिन उसे मार डालेगा।
साल 2025 में बाढ़ के दौरान भोजपुर जिला का एक गांव जवैनिया पूरी तरह नदी में समा गया और स्थानीय प्रशासन लोगो को जरूरी सामान तक नहीं मुहैया करवा पाई तब भरत ने लोगों की मदद की और बाढ़ गस्त लोगो को अभी भी आवास और जमीन दिलवाता था।
शायद यही समाज सेवा और सरकार के खिलाफ बोलना बिहार के नेताओ और सम्राट चौधरी की पुलिस को खटक गया।
