नगर निगम से कादरी की पार्षदी भी निरस्त कर दी थी। कादरी ने उच्चन्यायालय में जमानत अर्जी पेश की थी। दरअसल मामले में मुख्य आरोपित साहिल पर बलात्कार का प्रकरण था। उसे कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। उस प्रकरण में पीड़िता ने भी जमानत पर आपत्ति नहीं जताई थी।
इसी सिलसिले में कादरी की बेटी को भी गिरफ्तार किया गया था।
प्रशासन ने फरार आरोपित की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू की।
जिला कोर्ट में 29 अगस्त 2025 को कादरी ने समर्पण कर दिया था।
इंदौर। लव जिहाद में आरोपित पूर्व पार्षद अनवर कादरी को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने थाना बाणगंगा, जिला इंदौर में दर्ज अपराध क्रमांक 800/2025 के अंतर्गत आरोपी अनवर कादरी को जमानत प्रदान कर दी है।
बीते साल जून में अनवर कादरी पर लव जिहाद और हिंदू युवतियों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए फंडिग का आरोप लगा था। दो मुस्लिम युवकों के बयानों के आधार पर पुलिस ने कादरी पर भारतीय न्याय संंहिता और मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
प्रकरण दर्ज होने के बाद लंबे समय तक कादरी फरार रहा। बाद में पुलिस उस पर 40 हजार का ईनाम भी घोषित किया था। इसी सिलसिले में कादरी की बेटी को भी गिरफ्तार किया गया था। प्रशासन ने फरार आरोपित की संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान जिला कोर्ट में 29 अगस्त 2025 को कादरी ने समर्पण कर दिया।
तब से कादरी न्यायिक हिरासत में है। इस दौरान नगर निगम से कादरी की पार्षदी भी निरस्त कर दी थी।कादरी ने उच्चन्यायालय में जमानत अर्जी पेश की थी। दरअसल मामले में मुख्य आरोपित साहिल पर बलात्कार का प्रकरण था। उसे कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। उस प्रकरण में पीड़िता ने भी जमानत पर आपत्ति नहीं जताई थी।
इसके बाद कादरी की जमानत का रास्ता भी लगभग साफ हो गया था। जमानत अर्जी के साथ कादरी वकील ने कहा कि उसके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। पीड़िता द्वारा भी उसका नाम नहीं लिया गया है। अभियोजन की ओर से सह-आरोपी के कथन के आधार पर आरोपी को प्रकरण में जोड़ा गया है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है और विचारण पूर्ण होने में समय लग सकता है। वहीं, राज्य शासन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए बताया गया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में 18 अन्य आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन के बाद न्यायालय ने आरोपी की भूमिका को सीमित मानते हुए तथा सह-आरोपी को पूर्व में जमानत दिए जाने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए कादरी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं समान राशि के एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।जमानत अवधि के दौरान प्रत्येक रविवार कादरी को थाने में हाजिरी लगाना होगी।
