जिस व्यक्ति ने इंदौर को केवल एक शहर नहीं, बल्कि अपना घर माना, वह हैं कैलाश जी।
यह कोई सामान्य योगदान नहीं, बल्कि सच्चे सेवक की पहचान है।
कैलाश जी ने इंदौर को तांगे से मेट्रो तक पहुँचते देखा ही नहीं, बल्कि उस बदलाव के साक्षी व सूत्रधार भी रहे। उनकी कार्यशैली, नीयत और समर्पण पूरे शहर को भली-भांति ज्ञात है। उन्होंने हमेशा व्यक्तिगत लाभ से ऊपर शहर और जनता को रखा। आज यदि समय विपरीत है, तो यह याद रखना ज़रूरी है कि सच्चाई समय की मोहताज नहीं होती।
आपने जिस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली है, वह आपके चरित्र की ऊँचाई को दर्शाती है, न कि दोष को। जिम्मेदारी लेना अपराध नहीं, बल्कि नेतृत्व की पहचान है। दोषी वही होता है जिसकी नीयत में खोट हो,और इंदौर जानता है कि आपकी नीयत हमेशा साफ रही है।
आज केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश आपके साथ खड़ा है। जनता व्यथित है, क्योंकि जिस व्यक्ति ने शहर को संवारा, वही आज पीड़ा में है। यह समर्थन किसी पद का नहीं, बल्कि विश्वास और वर्षों की सेवा का परिणाम है।
कैलाश जी, आप हिम्मत रखिए।
आप अकेले नहीं हैं।
आपके साथ वह इंदौर है, जिसने आपकी मेहनत को जीया है।
आपके साथ वह जनता है, जिसने आपके प्रयासों को महसूस किया है।
आप एक सच्चे सेवक हैं, और सच्चे सेवकों का सम्मान समय अवश्य करता है।
पूरा इंदौर आपके साथ है,आज भी, और हमेशा।
